मौसम: पहाड़ पर मौसम का दोहरा मिजाज; चोटियों पर बर्फ, घाटियों में नदियां उफान पर

मौसम: पहाड़ पर मौसम का दोहरा मिजाज; चोटियों पर बर्फ, घाटियों में नदियां उफान पर
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देहरादून। उत्तराखंड में सितंबर की शुरुआत के साथ मौसम ने करवट बदल ली है। पहाड़ से मैदान तक बारिश का दौर जारी है, वहीं ऊंची हिमालयी चोटियों पर मौसम की पहली बर्फबारी ने ठंड की दस्तक दे दी है। बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की ऊंची चोटियां सफेद चादर से ढकने लगी हैं। नीति-माणा घाटी से लेकर चिनाप वैली, सोना शिखर, फूलों की घाटी, कुंठखाल और कागभुशुंडी जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में भी हिमपात हुआ है।
निचले इलाकों में लगातार बारिश के कारण स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर चेतावनी निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। शनिवार सुबह आठ बजे अलकनंदा का जलस्तर 625.90 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी स्तर 626 मीटर और खतरे का निशान 627 मीटर है। इसी तरह मंदाकिनी 624.90 मीटर पर बह रही थी, जबकि इसका चेतावनी स्तर 625 मीटर और खतरे का निशान 626 मीटर है।
नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर पहाड़ की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। बारिश का सिलसिला यदि इसी तरह जारी रहता है तो नदी-नालों के जलस्तर में और वृद्धि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों में निगरानी बनाए रखने की है, जहां बारिश के साथ भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा लगातार बना रहता है।
बारिश का असर सड़क संपर्क पर भी पड़ा है। जिले में एक राज्य राजमार्ग, पांच लोक निर्माण विभाग की सड़कें और सात पीएमजीएसवाई मार्ग बाधित बताए गए हैं। राज्य राजमार्ग संख्या-56 पर बांसवाड़ा-कणसिल-चंद्रनगर-मोहनखाल मोटर मार्ग अवरुद्ध है। हालांकि राष्ट्रीय राजमार्ग और एनपीसीसी के मार्ग फिलहाल सुचारु बताए गए हैं।
पिछले 24 घंटे में रुद्रप्रयाग तहसील में आठ मिलीमीटर, ऊखीमठ में 12.50 मिलीमीटर और जखोली में 15 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यानी बारिश की मात्रा भले ही फिलहाल बेहद असाधारण न हो, लेकिन पहाड़ों की भौगोलिक संवेदनशीलता के कारण इसका असर नदी, सड़क और यातायात व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है।
चमोली के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम ने दूसरी तस्वीर पेश की है। लगातार बारिश के बीच बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब के आसपास की चोटियों पर सीजन का पहला हिमपात हुआ है। नीति और माणा घाटी में ठंड बढ़ने लगी है। ऊंची चोटियों पर बर्फ की सफेद परत जमने से जहां मौसम में बदलाव का संकेत मिल रहा है, वहीं निचले क्षेत्रों में बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है।

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