मुश्किल: एक सप्ताह बाद भी नहीं खुल सका यमुनोत्री हाईवे, प्रयास जारी
उत्तरकाशी। यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड में भूस्खलन प्रभावित स्थान पर एक सप्ताह से लगातार मार्ग खोलने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। सिलाई बैंड में भूस्खलन प्रभावित स्थान पर तीन पोकलैंड एवं दो जेसीबी कार्य कर रही हैं। मार्ग न खुलने से यमुनोत्री धाम की यात्रा भी ठप है। यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड में जहां पोकलैंड मशीन और जेसीबी की मदद से मार्ग खोलने के प्रयास जारी हैं, वहीं ओजरी में बैली ब्रिज तैयार किया जा रहा है। एक सप्ताह बाद भी मार्ग सुचारू न होने से यमुनोत्री धाम की यात्रा शुरू नहीं हो पाई है। यात्रियों को बेसब्री से मार्ग खुलने का इंतजार है। यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए यात्रियों की नजर मार्ग खुलने पर टिकी है। वाहन चालक अभी भी स्यानचट्टी, रानाचट्टी, जानकीचट्टी आदि स्थानों पर फंसे हुए हैं। जिलाधिकारी प्रशांत आर्या ने बताया कि ओजरी के पास बैली ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। तेज गति के साथ ब्रिज का निर्माण हो रहा है। सिलाई बैंड में भी मशीनें मार्ग खोलने में जुटी है। बता दें कि गत 29 जून को सिलाई बैंड में अतिवृष्टि से यमुनोत्री हाईवे का 20 से 30 मीटर हिस्सा ओजरी तक वाश आउट हो गया था। इस घटना में नौ मजदूर भी लापता हो गए थे, जिनमें से दो के शव मौके से बरामद किए गए। सात लापता लोगों की तलाश में अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं ने बताया कि आपदा प्रबंधन एवं एसडीआरएफ के ड्रोन ऑपरेटर द्वारा सिलाई बैंड एवं ओजरी क्षेत्र में ड्रोन कैमरे के माध्यम से वीडियोग्राफी की जाएगी। साथ ही साथ नदी किनारो पर भी ड्रोन कैमरे चलाए जाएंगे ताकि लापता व्यक्तियों की खोजबीन में सहयोग प्राप्त हो सके। वर्तमान में सिलाई बैड मे आपदा प्रबंधन के मास्टर ट्रेनर , क्यूआरटी टीम, ड्रोन ऑपरेटर आपदा प्रबंधन एवं ड्रोन ऑपरेटर एसडीआरएफ मौजूद है।

