मांग: छूटे हुये आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण तथा भू कानून बनाने को लेकर उतरे सड़क पर

मांग: छूटे हुये आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण तथा भू कानून बनाने को लेकर उतरे सड़क पर
Spread the love

देहरादून। चिन्हीकरण तथा अपने भू कानून की मांग को लेकर आज संयुक्त परिषद के बैनरतले राज्य आंदोलनकारियों सचिवालय कूच किया। आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री के अपना ज्ञापन भी प्रेषित किया।

राज्य आंदोलनकारियों का कहना था कि राज्य को बने हुए लगभग 23 वर्ष होने को हैं। उत्तराखंड के लोग राज्य आंदोलनकारी आज भी स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। राज्य गठन के बाद कुछ मुट्ठी भर भूमाफिया, शराब माफिया, नकल माफिया, खनन माफिया आदि ने एक गिरोह बनाकर उत्तराखंड राज्य का बेहिसाब दोहन किया है। खनिज संसाधनों पर अपना कब्जा कर लिया है।

राज्य आंदोलनकारियों ने मांग की है कि उत्तराखंड आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण शीघ्र पूरा हो तथा जिसमें छूटे  हुए आंदोलनकारी का चिहिकरण शीघ्र किया जाए। सभी आंदोलनकारीयों को समान पेंशन 15 हजार तथा पेंशन पट्टा प्रदान किया जाए। सभी आंदोलनकारी को एक समान पेंशन दी जाए। हिमाचल की तर्ज पर धारा 371 उत्तराखंड राज्य में लागू की जाए।

उत्तराखंड के लिए एक सशक्त भूकानून जल्द से जल्द बनाया जाये। इस भू कानून को सख्ती से लागू किया जाए। मूल निवास वर्ष 1950 के आधार पर लागू किया जाये। जो उच्चतम न्यायालय की गाइड लाइन के अनुसार है 15 साल का अस्थाई निवास प्रमाण पत्र व्यवस्था अवैध है जिसे तुरंत समाप्त किया जाए।

प्रदर्शनकारियों में उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद नवनीत गुसाईं,विपुल नौटियाल, सुरेश कुमार, उत्तराखंड महिला मंच जनवादी महिला समिति की इन्दु नौडियाल, नुरैशा अंसारी, माकपा नेता सुरेन्द्र सिंह सजवाण, राजेन्द्र पुरोहित, अनन्त आकाश‌, सीटू नेता लेखराज, रविन्द्र नौडियाल‌, नेताजी संघर्ष समिति प्रभात डण्डरियाल, पूर्व अध्यक्ष गणेश डंगवाल, अनुराग भट्ट, जगमोहन रावत, रामपाल, अमित पंवार, धर्मानंद भट्ट, सुशील विरमानी, मुन्नी खंडूरी, पुष्प लता सिल्माना, जितेंद्र चौहान, उत्तराखंड क्रांति दल से प्रमिला रावत, जबर सिंह पावेल आदि शामिल रहे।

 

Parvatanchal