बड़ी ख़बर: अपने विरुद्ध किए जा रहे दुष्प्रचार पर प्रमाण मांगने भाजपा प्रदेश मुख्यालय पहुंच कर गरजे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत

बड़ी ख़बर: अपने विरुद्ध किए जा रहे दुष्प्रचार पर प्रमाण मांगने भाजपा प्रदेश मुख्यालय पहुंच कर गरजे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत
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देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आज ठीक 1 बजे पहुॅचे नेहरू काॅलोनी के फव्वारा चौक स्थित भाजपा कार्यालय पहुंच गए। हालाकि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने भाजपा कार्यालय तक के मार्च को एकांकी बताया था फिर भी स्वतस्फूर्त होकर भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता हरीश रावत के साथ नारे लगाते हुए चलते रहे। पुलिसबल द्वारा भाजपा मुख्यालय की चौतरफा बैरिकेड़ लगाकर घेराबंदी की गई थी। बेरिकेडिंग पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं व पुलिस के बीच धक्कामुक्की के उपरांत पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भाजपा मुख्यालय तक पहुंचने में सफल हो गए। भाजपा मुख्यलय के निकट पहुॅचकर उन्होंने सर्वप्रथम देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई को श्रद्धाजंलि व नमन करते हुए कहा कि आज की भाजपा को स्वर्गीय अटल जी से सीख लेनी चाहिए कि कैसे सबको साथ लेकर सामाजिक सौहार्द बनाया जाता है।
उन्होंने कहा- ‘भाजपा के दोस्तों, आप मेरी सार्वजनिक छवि को खराब करने के लिए झूठ बोलते हो। सब मिलकर बोलते हो नीचे से ऊपर तक। चुनौती देने पर प्रमाण देते नहीं हो। इसलिए मैं आज आपसे प्रमाण पत्र मॉगने आया हूॅ।’ रावत ने कहा- ‘आप द्वारा छद्म तौर पर संचालित किये जा रहे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों में मुझे पाकिस्तान के लिए जासूसी करता राष्ट्रद्रोही दिखाया गया है। मुझे गोली मार कर मेरे प्रति नफ़रत आधारित हिंसा को प्रोत्साहित किया गया है। प्रमाण दो कि मैं पाकिस्तान का जासूस हूं। आपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A I) कृत्रिम मेघा का दुरुपयोग कर मेरी छवि इस प्रकार प्रस्तुत की है, जिससे राज्य का सामाजिक सौहार्द बिगड़े व उसका मैं केंद्र बिंदु बनूं। आपके आईटी सेल उत्तराखंड भाजपा के अध्यक्ष ने जिसे अपने आधिकारिक पेज में डालकर प्रचारित- प्रसारित किया है। आपने जो दिखाने का प्रयास किया है, वैसा मैंने कहां किया उसका प्रमाण दो।’
उन्होंने यह भी कहा-  ‘वर्ष 2017 में आपने मेरे नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि हमने जुम्मे की नमाज़ अर्थात शुक्रवार की नमाज पढ़ने के लिए राज्य के सरकारी कार्यालयों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। जबकि आप व माननीय प्रधानमंत्री जी जानते हैं कि कोई भी सरकार किसी धर्म के त्यौहार का अवकाश तो घोषित कर सकती है, परंतु धर्म विशेष की प्रार्थना के लिए छुट्टी घोषित नहीं कर सकती है। फिर भी आप सबने मिलकर झूठ फैलाया और अभी तक कथित छुट्टी का गजट नोटिफिकेशन नहीं दिखाया है और राज्य में कहां व किस कार्यालय में शुक्रवार को छुट्टी हुई है या हो रही है, अभी तक प्रमाण नहीं दिया है। क्योंकि ऐसी कोई भी छुट्टी राजपत्र में अधिसूचित अर्थात गजट नोटिफाइड होती है। आप वह गजट नोटिफिकेशन दिखाइए। राज्य अवकाशों की सूची भी नहीं दिखाई है। कथित चिट्ठी कभी भी आप बनवा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा- ‘आपकी पार्टी व आपके शीर्षस्थ नेताओं ने यह जानते हुए भी कि भारत का संविधान धर्म के आधार व धर्म के नाम पर कोई विश्वविद्यालय या संस्थान खोलने की अनुमति नहीं देता है। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा व भाजपा के नेताओं ने झूठ बोला कि मैंने यह कहा कि कांग्रेस सत्ता में आएगी तो मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाएगी। मेरे चुनौती देने के बाद भी अभी तक मेरा कोई ऐसा सार्वजनिक बयान जो समाचार पत्रों में छपा हो या मीडिया के किसी भी प्लेटफार्म पर मैंने दिया हो, मेरे बयान के प्रमाण स्वरूप सार्वजनिक नहीं कर पाए हो! भाजपा का डर्टी ट्रिक्स सोशल मीडिया ही इस झूठ को बनाता है व लगातार फैलाता है। आपके माननीय मुख्यमंत्री बार-बार राज्य में आगे भारी डेमोग्राफिक बदलाव की बात करते हैं। किस वर्ष कितना ऐसा बदलाव हुआ उसका आधिकारिक ब्यौरा नहीं देते हैं। सरकार एक स्वतंत्र सिटिजन सोशियल ऑडिट कमेटी गठित कर दो माह में उसके अध्ययन को सार्वजनिक करे कि कब किस वर्ष में कितना बदलाव हुआ और आपकी सरकार इस बदलाव को ठीक करने के लिए क्या कदम उठा रही है। राज्य में कितने बांग्लादेशी घुसपैठिए पाए गए हैं, यह किस वर्ष में आए और इन्हें निकाल बाहर करने के लिए आपने अभी तक क्या-क्या कदम उठाये हैं?’


पूर्व सीएम हरीश रावत ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर वायरल हो रहे गटटू- भटटू व भाजपा के पूर्व विधायक की कथित पत्नी द्वारा वीआईपी का नाम उजागर करने पर भी भाजपा सरकार को घेरा और कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या उत्तराखण्ड़ के आत्मसम्मान की हत्या है और जिस प्रकार से सबूत नष्ट किए गए, बुल्डोजर चलाया गया, फौरेसिंक तथ्य मिटाए गए वो सब पार्टी के गटटू भटटू को बचाने की साजिश रही है। इस पूरे प्रकरण की सर्वोच्च न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जॉच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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