निगरानी: मोहान वन क्षेत्र में बाघ की निगरानी जारी, रेस्क्यू के लिए नौ पिंजरे और ड्रोन की मदद

निगरानी: मोहान वन क्षेत्र में बाघ की निगरानी जारी, रेस्क्यू के लिए नौ पिंजरे और ड्रोन की मदद
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रामनगर (आरएनएस)।  मोहान वन क्षेत्र के डबरा सौराल, तड़म और काठ की नाव क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग ने निगरानी और रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया है। वन विभाग की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में डेरा डालकर बाघ की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं तथा लोगों को सतर्क रहने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। एसडीओ वन विभाग काकुल सिंह पुंडीर ने बताया कि उप प्रभागीय वनाधिकारी रानीखेत के निर्देशन में गठित टीमें क्षेत्र में लगातार गश्त, निगरानी और रेस्क्यू अभियान चला रही हैं। ग्राम सभा डबरा सौराल और तड़म के रास्तों एवं पगडंडियों पर झाड़ियों की कटाई कराई जा रही है, ताकि लोगों की आवाजाही सुरक्षित हो सके और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। उन्होंने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में बाघ के पथमार्गों और अन्य गतिविधियों की पहचान की जा रही है। अभियान में छह एनाइडर, सात फॉक्स लाइट, राइफल और गांधी बंदूक जैसे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए क्षेत्र में नौ पिंजरे लगाए गए हैं। इसके अलावा दो ड्रोन, दो लाइव कैमरे और 36 कैमरा ट्रैप के माध्यम से वन्यजीव की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। वन विभाग की गश्ती टीमें नियमित रूप से पिंजरों, कैमरा ट्रैप और अन्य उपकरणों की जांच कर रही हैं। वहीं रेस्क्यू टीम बाघ की लोकेशन ट्रैक कर उसे सुरक्षित पकड़ने के प्रयास में जुटी है। ग्रामीणों को पोस्टर, लाउडस्पीकर और जनजागरूकता गोष्ठियों के माध्यम से सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है। एसडीओ ने बताया कि रेस्क्यू अभियान में कॉर्बेट की विशेषज्ञ टीम और चिकित्सकों का भी सहयोग लिया जा रहा है। सोमेश्वर और अल्मोड़ा रेंज की वन विभाग की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में कैंप लगाकर गश्त, निगरानी और जनजागरूकता अभियान में सहयोग कर रही हैं।

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