नज़रिया: भारत के मुस्लिम नेता भी करें बांग्लादेश की घटनाओं का विरोध

नज़रिया: भारत के मुस्लिम नेता भी करें बांग्लादेश की घटनाओं का विरोध
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अजय दीक्षित
   पिछले कुछ दिनों में भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है और हुआ है, वह भारत के लिए गंभीर चिंता और संकट का विषय है । आई.एस.आई., जमाते इस्लामी, अल-कायदा और अन्य मुस्लिम उग्रवादी संगठनों ने बांग्लादेश के हिन्दुओं पर अत्याचार शुरू कर दिया है । सन् 1947 में जब भारत का विभाजन हुआ था तब पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में 30 प्रतिशत हिन्दू रहते थे । असल में वे जगत गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर को अपना आराध्य मानते हैं । वे सभी बांग्लाभाषी हैं । उनका खान-पान, रहन-सहन, सोच विचार बांग्लादेश के मुसलमानों के समान ही था और है । हिन्दू और मुसलमान के बीच फर्क केवल आराध्य को लेकर रहा है । मुसलमान मस्जिद में जाता है – हिन्दू मंदिर में जाता है । ढाका में काली का बहुत प्रसिद्ध मंदिर है । ढाका के सबसे बड़े कॉलेज का नाम जगन्नाथ कॉलेज है । विभाजन से पूर्व यही नाम था और अभी कुछ वर्ष पहले तक यही नाम रहा है । बांग्लादेश में एक हिन्दू आदिवासी सम्प्रदाय का बहुत बड़ा आस्था स्थल है । जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हो रहे थे तो चुनाव के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश गये थे और उस आदिवासी पूजा स्थल पर उन्होंने आराधना भी की थी। पश्चिम बंगाल में उस समुदाय के बहुत से वोटर हैं । भारत के विपक्ष ने तब आरोप लगाया था कि मोदी जी ने चुनाव के बीच वहां जाकर पश्चिम बंगाल के असेंबली चुनाव में जीत के लिए उस समुदाय को साधने के लिए बांग्लादेश में उक्त समुदाय के पूजा स्थल का दौरा किया था।
सन् 1971 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की कूटनीति से पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गये और पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश के नाम से एक अलग देश बन गया ।
खालिदा जिया भी कुछ दिन बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रही हैं, परन्तु शेख हसीना ने उन्हें जेल में डाल रखा था। शेख हसीना ने नौकरी में आरक्षण को लेकर आन्दोलन कर रहे छात्रों को गुंडा कहा था। यूं शेख हसीना सन् 2008 से वहां की प्रधानमंत्री रही हैं । परन्तु उन पर आरोप है कि पिछले दो चुनावों में उन्होंने धांधली की थी। उन्होंने विपक्ष का गला घोंट रक्खा था। फौज से भी उनके सम्बन्ध कुछ बहुत मधुर नहीं थे ।
भारत की विदेश नीति के तहत भारत ने बांग्लादेश से मधुर संबंध रक्खे जो मोदी के कार्यकाल में और भी बढ़ गये। यद्यपि यह मधुर संबंध सन् 2008 से चल रहे थे, जब सत्ता में कांग्रेस थी ।
असल में शेख हसीना को भारत में शरण देना बहुत खतरनाक होगा । मुस्लिम उग्रवादी संगठनों ने बांग्लादेश के हिन्दुओं पर अत्याचार करना शुरू कर दिया है। हिन्दू प्रतिष्ठानों को लूट लिया गया है। हिन्दू स्त्रियों के साथ दुराचार हो रहा है। उनके अंग वस्त्रों के साथ बदतमीजी हो रही है। लगभग एक करोड़ तीस लाख हिन्दू भारत के बॉर्डर पर खड़े हैं ।
आज बांग्लादेश में मात्र सात प्रतिशत हिन्दू हैं जबकि 1947 में उनका प्रतिशत तीस था। भारत के बहुत से राज्यों की सीमा बांग्लादेश से मिलती है । आज असम में बहुत बड़ी संख्या में बांग्लाभाषी मुसलमान हैं, जबकि असम की भाषा असमिया है। भारत हिन्दुत्व के नाम पर डेढ़ करोड़ हिन्दुओं को भारत में शरण नहीं दे सकता ।
भारत के मुस्लिम संगठनों के नेताओं को खुलकर और उग्र स्वर में बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ जो हो रहा है उसका विरोध करना चाहिये ।
आज चीन भारत के पड़ोसी देशों में काबिज है। नेपाल, पाकिस्तान, वर्मा, मालदीव, अफगानिस्तान, श्री लंका सभी देशों में चीन की बढ़त है। यह भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत का मुसलमान समन्वयवादी और उदार है। दुनिया भर के मुस्लिम देशों को बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ जो हो रहा है, इसका विरोध करना चाहिए । यही सच्ची मानवता है और यही इस्लाम की सच्ची शिक्षा है, क्योंकि इस्लाम भाई-चारे में विश्वास करता है और भारत का मुसलमान बांग्लादेश के हिन्दुओं के साथ खड़ा है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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