तैयारी: कांग्रेस भवन में हुई इंडिया एलाइंस व सिविल सोसाइटी के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक
प्रतीकात्मक विधानसभा सत्र के मुद्दों पर की गयी विस्तृत चर्चा
देहरादून। इंडिया एलाइंस और सिविल सोसाइटी के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को कांग्रेस भवन में हुई। बैठक में गैरसैंण में 27 तारीख को आयोजित होने वाले प्रतीकात्मक विधानसभा सत्र के संचालन पर विस्तार से वार्ता हुई और सभी ने गैरसैंण पहुंचने पर सहमति जताई। बैठक में सभी वक्ताओं ने राज्य के हालात पर चर्चा की। राज्य में जिस तरीके से जन भावना की लगातर सरकार उपेक्षा कर रही है उस पर चिंता व्यक्त की गई।
वक्ताओं ने सवाल उठाया कि फरवरी, मार्च में अगर सरकार गैरसैंण में विधानसभा का सत्र आयोजित नहीं कर पा रही है तो फिर कब आयोजित करेगी ? इसके बाद चार धाम यात्रा का बहाना बनाया जाएगा, जैसे पिछले वर्षों से बनाए जाते रहे हैं। कुल मिलाकर सरकार गैरसैंण में ना तो विधानसभा का सत्र चलाना चाहती है ना गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित करना चाहती है। इसीलिए गैरसैंण की लगातार उपेक्षा की जा रही है । भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में जो वादे अपने घोषणा पत्र में किए थे उन पर भाजपा की सरकारों ने कोई काम नहीं किया। बेरोजगारों को रोजगार देने का वादा भी उन्हीं में से एक है। सरकार ने रोजगार देना तो दूर उल्टा बेरोजगारों की नौकरियों को बेचने और पुलिस की लाठी से पीटने का काम किया। भाजपा सरकार बेटियों को सुरक्षा भी नहीं दे सकी। पहाड़ से पलायन को भी नहीं रोक सकी। पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विकास तो दूर मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। सरकार का काम विकास करना होता है मगर उल्टे विकास का पहिया रुक गया है। पर्वतीय क्षेत्रों की तो दूर की बात है, मैदानी क्षेत्र भी विकास के मामले में पिछड़ते जा रहे हैं क्योंकि सरकार के पास अनुभव की कमी तो है ही, सरकार के पास इच्छा शक्ति भी नहीं है। केवल कोरी घोषणाओं और झूठ के सहारे जनता को बरगलाने का प्रयास हो रहा है ।
वक्ताओं ने कहा कि भाजपा सरकार महिला विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन राज्य में बेटियां सुरक्षित नहीं हैंं। आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता हो आशा वर्कर हो या स्वास्थ्य विभाग की अन्य बहनें, लगातार अपनी आवाज उठा रही हैं लेकिन हर आवाज को दबाने के लिए सरकार ने पूरा जोर लगाया है । भाजपा के मंत्रियों और विधायकों के सर प्रचंड बहुमत का नशा चढ़ा हुआ है और भाजपा सरकार अहंकार में डूबी हुई है। इसीलिए सरकार लगातार मनमानी कर रही है और विपक्ष की आवाज को दबाने का काम कर रही है। देश के किसानों के बकाया भुगतान की भी सरकार को फिक्र नहीं है। किसान लगातार अपनी मांगों के लिए आवाज उठा रहे हैं, और सरकार उनकी आवाज को अनसुना करने का काम कर रही है। 27 तारीख को गैरसैंण में प्रतीकात्मक विधानसभा सत्र के आयोजन का मकसद सरकार को सीधा संदेश देना है कि पेपर लीक प्रकरण और बेरोजगारों के रोजगार से कोई समझौता नहीं होगा, ना ही बेटी अंकिता भंडारी प्रकरण में वीआईपी के नाम को दबाने दिया जाएगा, ना ही बेटियों की सुरक्षा से कोई समझौता होगा। पहाड़ के विकास पर भी विपक्ष सरकार को घेरने का काम करेगा और खनन माफिया और शराब माफिया के दबाव में सरकार जो काम कर रही है, उस पर भी सरकार से सवाल, जवाब किए जाएंगे। गैरसैण को राज्य की स्थाई राजधानी कब घोषित किया जाएगा और गैरसैंण की उपेक्षा कब बंद होगी इसका जवाब भी सरकार से पूछा जाएगा।
वक्ताओं ने कहा कि आखिर उत्तराखंड का उपभोक्ता सबसे महंगी बिजली खरीदने के लिए क्यों मजबूर है, इसका जवाब भी प्रतीकात्मक विधानसभा में सरकार से लिया जाएगा। उपनल कर्मचारियों, कोविड कर्मचारियों की मांगों और पुरानी पेंशन पर भी सरकार से सवाल पूछे जाएंगे। बैठक में कांग्रेस उपाध्यक्ष मथुरा दत्त जोशी, सी पी एम के प्रदेश सचिव राजेंद्र सिंह नेगी, सी पी आई के समर भंडारी, सीपीआईएमएल के इंद्रेश मैखुरी, इंडिया एलाइंस और सिविल सोसाइटी के कोऑर्डिनेटर शीशपाल सिंह बिष्ट,आम आदमी पार्टी की उमा सिसोदिया, किसान सभा के सुरेंद्र सिंह सजवाण , सरदार अमरजीत सिंह व मजदूर नेता शंकर गोपाल आदि ने प्रतिभाग किया ।

