आवाज़: गांवों को इको सेंसिटिव जोन में शामिल करने का विरोध शुरू, प्रभावित होंगे मूल अधिकार 

आवाज़: गांवों को इको सेंसिटिव जोन में शामिल करने का विरोध शुरू, प्रभावित होंगे मूल अधिकार 
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कोटद्वार। रिखणीखाल ब्लॉक के पैनों पट्टी-2 के अंतर्गत बंजा देवी, रथुवाढाब, तैड़िया, कांडानाला, कालिकों आदि गांवों के ग्रामीणों ने उनके गांवों को इको सेंसिटिव जोन में शामिल करने का विरोध किया है। कहा कि इनमें से किसी भी गांव को इको सेंसिटिव जोन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। इस संबध में ग्रामीणों की बुधवार को बंजा देवी में आयोजित बैठक में राजस्व उपनिरीक्षक विवेक शाह ने ग्रामीणों को इस संबंध में एसडीएम की ओर से प्रेषित पत्र का हवाला दिया। कहा कि हाईकोर्ट नैनीताल में इस संबंध में इंडिपेंडेंट मेडिकल इनिशिएटिव सोसाइटी की ओर से याचिका दायर की गई है। वहीं न्यायालय ने इस संबंध में कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन को मामले में जनसुनवाई के आदेश दिए हैं। बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांवों के इको सेंसिटिव जोन में शामिल होने से उनके मूल अधिकार प्रभावित होंगे। विकास कार्यों के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी हो जाएगी, जिससे गांव के विकास कार्य पूरी तरह से प्रभावित होंगे। बैठक में शामिल लोगों ने चेतावनी दी कि भविष्य में सरकार ने इन गांवों में ईको सेंसिटिव जोन लागू किया तो क्षेत्रीय जनता व जनप्रतिनिधि आंदोलन करने पर बाध्य होंगे। बैठक में ग्राम कांडा की ग्राम प्रधान विनीता ध्यानी, कर्तिया की प्रधान पिंकी देवी, मनवर सिंह, चमन सिंह, अंबिका प्रसाद, शिशुपाल सिंह, सूरज कुमार, हरपाल सिंह और नंदलाल देवरानी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय ग्रामीण मौजूद रहे।

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