आरोप: राहुल गांधी बोले-सरकार अमेरिका के आगे झुकी, चुपचाप यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खोला
नईदिल्ली (आरएनएस)। यूपीआई के जरिए 2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर संभावित शुल्क लगाने को लेकर सियासत गरमा गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा सरकार ने चुपचाप यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है। राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अमेरिका के आगे झुक रही है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि मोदी सरकार की लूट यूपीआई तक पहुंच गई है।
राहुल ने कहा, सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन दुकानदार पर लगने वाला शुल्क आखिर आएगा कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से। अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की शून्य-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है। अमेरिकी व्यापार समझौते की तरह ही प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं।
खड़गे ने कहा, गगनचुंबी महंगाई से आम आदमी की जेब पहले ही खाली है। थोक महंगाई 10 प्रतिशत के करीब है और भाजपा सरकार ने जनता पर डिजिटल पेमेंट टैक्स लगाकर बची-कुची बचत को भी तबाह करने की योजना बना दी है। वित्त मंत्री ने संसद में कहा था कि यूपीआई पर कोई शुल्क या कर नहीं लगेगा। पर खबरों के मुताबिक, 5,000 के भुगतान पर 25 और 10,000 पर 50 रुपये तक की वसूली की जाएगी। ये सच है?
खड़गे ने कहा, 10 साल पहले नोटबंदी करके देश की अर्थव्यवस्था को झटका दिया गया। जब नोटबंदी के विनाशकारी नतीजों पर सवाल उठे, तो सरकार ने दलील दी थी कि नोटबंदी डिजिटल भुगतान और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए थोपी गई। एमडीआर की बात करें तो सरकार को क्या यह नहीं पता कि व्यापारी पर पड़ने वाला यह अतिरिक्त बोझ आखिरकार कीमतों के जरिए आम उपभोक्ता की जेब से ही वसूला जाएगा?
दरअसल, वित्त मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है, जिसमें कहा गया है कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान पर बैंक कोई शुल्क नहीं ले सकते। रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान को भी इस छूट में शामिल किया गया है।
हालांकि, 2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर शुल्क को लेकर नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) फैसला लेगी। ये दुकानदारों और कारोबारियों से लिए जाने वाले एमडीआर शुल्क होगा।

