आंखों देखी: सीएम धामी के संबोधन के दौरान पास के जंगल में लग गई आग, अफसरों में मचा हड़कंप

आंखों देखी: सीएम धामी के संबोधन के दौरान पास के जंगल में लग गई आग, अफसरों में मचा हड़कंप
Spread the love

 

हल्द्वानी। उत्तराखंड एक वन प्रदेश है, तो यहां वनाग्नि की घटनाएं भी होती रहती हैं। राज्य में 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन माना जाता है। लेकिन इस बार सर्दियों में भी उत्तराखंड के जंगल धधकने लगे हैं। बुधवार को तो तब हद हो गई, जब नैनीताल जिले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जनसभा को संबोधित कर रहे थे और वहीं पास के जंगल में आग लग गई। जनसभा स्थल से वनाग्नि की लपटें और धुआं साफ दिख रहा था। इस दौरान अफसरों की नजरें सीएम के कार्यक्रम पर कम, वनाग्नि पर ज्यादा टिकी रहीं।
मुख्यमंत्री धामी के जमरानी बांध परियोजना के स्थलीय निरीक्षण और जनता को संबोधन कार्यक्रमौरान के दौरान उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जमरानी बांध परियोजना के ऊपर पहाड़ी पर जंगल में अचानक आग भड़क उठी। हैरानी की बात ये रही कि जिस समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद मौके पर मौजूद थे और स्थानीय लोगों को संबोधित कर रहे थे, उसी दौरान जंगल से उठती आग की लपटें साफ नजर आने लगीं। हालांकि मुख्यमंत्री जंगलों में लग रही आग को चुनौती मान रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए विभाग को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।
चौंकाने वाली बात ये है कि इस बार सर्दियों के मौसम में भी पहाड़ों के जंगल धधक रहे हैं। वन विभाग आग पर काबू पाने के दावे जरूर कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ताजा मामला भीमताल विधानसभा क्षेत्र के जमरानी क्षेत्र का है। यहां पर जंगल धधक रहा है। जमरानी बांध परियोजना के ठीक ऊपर पहाड़ी क्षेत्र के जंगल में अचानक आग लग गई।
यह घटना उस समय हुई, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जमरानी बांध परियोजना के स्थलीय निरीक्षण के दौरान स्थानीय जनता को संबोधित कर रहे थे। जंगल में आग की लपटें दिखाई देने के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद प्रशासनिक और वन विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आग बुझाने के लिए वन विभाग की टीम को मौके पर रवाना किया गया। अधिकारियों ने आग पर काबू पाने के लिए आवश्यक संसाधनों के साथ अभियान शुरू कर दिया।
इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फॉरेस्ट फायर को लेकर कहा कि जंगलों में आग हमारे लिए बड़ी चुनौती है। इसको रोकने के लिए हम पूरी तरह अलर्ट पर हैं। पहाड़ के लिए वनाग्नि चुनौती जरूर है, जिसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे 24 घंटे अलर्ट मोड में रहें और ऐसी घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई करें।

Parvatanchal