असंतोष: विद्यालयों के समय में बदलाव का शिक्षक संगठनों ने किया कड़ा विरोध
चमोली। राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों के खुलने और छुट्टी के समय में प्रस्तावित परिवर्तन को लेकर जिले के शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार के विद्यालयों की समय-सारिणी में किया जा रहा संशोधन न तो व्यावहारिक है और न ही विद्यार्थियों के हित में है। इससे बच्चों को अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संगठन चमोली के जिलाध्यक्ष नरेंद्र रावत, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष उपेंद्र सती, प्राथमिक शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह नेगी, जिला मंत्री मुकेश नेगी, संयुक्त जिला मंत्री महिपाल चौहान तथा जिला कोषाध्यक्ष प्रेम सिंह फर्स्वाण ने संयुक्त रूप से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सरकार द्वारा प्रदेश के सभी विद्यालयों के लिए एक समान समय-सारिणी लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत विद्यालय प्रातः 8ः50 बजे खुलेंगे और अपराह्न 3ः15 बजे छुट्टी होगी, जो शीतकाल और ग्रीष्मकाल दोनों में समान रूप से लागू रहेगी।
शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में एकरूप समय-सारिणी व्यवहारिक नहीं है। ग्रीष्मकाल में मैदानी और कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी के कारण दिन के समय पढ़ाई का माहौल अनुकूल नहीं रहता, जबकि शीतकाल में पहाड़ों के दूर-दराज गांवों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रातः 8ः50 बजे तक विद्यालय पहुंचना कठिन हो जाता है।
इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में सूअर, भालू, बाघ सहित अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है, जिससे सुबह और शाम के समय विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा बना रहता है। शिक्षक संगठनों ने कहा कि इन सभी पहलुओं की अनदेखी कर समय-सारिणी में बदलाव करना उचित नहीं है।
शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि विद्यार्थियों के हित, सुरक्षा और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों के खुलने और छुट्टी के समय की पूर्ववर्ती व्यवस्था को यथावत बनाए रखा जाए तथा इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए।

