अलविदा: लाल सलाम के नारों के बीच दी गई कॉमरेड निशान सिंह को अंतिम विदाई
रुद्रपुर(आरएनएस)। मजदूर, किसान और शिक्षक आंदोलनों के वरिष्ठ नेता कामरेड मास्टर निशान सिंह को रविवार को क्रांतिकारी नारों और लाल झंडों के बीच अंतिम विदाई दी गई। उनके आवास से निकली अंतिम यात्रा श्मशान घाट पहुंची, जहां पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा से पूर्व आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि कामरेड निशान सिंह तराई के जनसंघर्षों की एक महत्वपूर्ण पहचान थे। युवावस्था से ही उन्होंने किसान-मजदूर आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि कामरेड निशान सिंह का जीवन सादगी, संघर्ष और क्रांतिकारी विचारों के प्रति समर्पण का प्रतीक था।
उनका निधन तराई के छह दशकों से अधिक लंबे जनसंघर्षों के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है, लेकिन उनके विचार और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। इस अवसर पर वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता बहादुर सिंह जंगी ने क्रांतिकारी विदाई गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद उनकी पार्थिव देह पर कम्युनिस्ट पार्टी का लाल झंडा ओढ़ाया गया और परिजनों व उपस्थित लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की। गगनभेदी नारों के बीच लाल झंडों के साथ निकली अंतिम यात्रा श्मशान घाट पहुंची, जहां अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। अंतिम विदाई में उनकी पत्नी जगजीत कौर, बेटी एवं बार काउंसिल सदस्य अमनदीप कौर, वैज्ञानिक नवनीत कौर, पुत्र निशांत सिंह, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, बार काउंसिल सदस्य दिवाकर पांडे, भाकपा (माले) के जिला सचिव ललित मटियाली, केके बोरा, अनीता अन्ना, दिनेश तिवारी, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डीएस मेहता सहित भाकपा (माले), ऐक्टू, किसान संगठनों, विभिन्न राजनीतिक दलों, बार एसोसिएशन, शिक्षक एवं सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों के प्रतिनिधियों समेत सैकड़ों लोग शामिल रहे।

