अमरीका-इजरायल हमलों में ईरान में अब तक 550 लोगों की मौत, 131 नगरों को पहुंचा नुकसान
तेहरान। ईरान पर अमरीका और इजरायल के संयुक्त हमले तीसरे दिन भी जारी रहे और ईरान ने प्रतिशोधात्मक कार्रवाई करते हुए खाड़ी के कई देशों को निशाना बनाया। इन हमलों में ईरान में बीते दो दिनों में 555 लोगों की मौत हो गई है और देश के 131 नगरों को इन हमलों में खासा नुकसान पहुंचा है। युद्ध क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाने वाली संस्था रेड क्रिसेंट ने यह जानकारी दी है। इस बीच फ्रांस और ब्रिटेन ने ईरान के हमले के शिकार बने खाड़ी देशों की मदद का ऐलान किया है।
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बैरट ने कहा है उनका देश खाड़ी के देशों की सुरक्षा करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि फ्रांस, ईरान के खिलाफ जार्डन की मदद करेगा। उनके सहयोगी देशों बहरीन, कुवैत, ओमान,कतर, इराक को इस जंग में घसीटा गया है। हम उनकी सुरक्षा के लिए तैयार हैं। इस बीच बहरीन पर हुए ईरानी हमले की जानकारी देते हुए ब्रिटेन के विदेश मंत्री कूपर ने कहा कि साइप्रस के ब्रिटिश सैन्य अड्डे को निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में ब्रिटेन को अपनी जिम्मेदारी का अहसास है और यह खाडी में हमारे सहयोगियों की रक्षा से संबंधित है।
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने एक संयुक्त बयान में कहा, ” हम क्षेत्र में अपने और अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएंगे, जिसमें आवश्यक और आनुपातिक रक्षात्मक कार्रवाई सक्षम करना शामिल हो सकता है, ताकि ईरान की मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता को उनके स्रोत पर नष्ट किया जा सके। ” बयान में कहा गया कि इस मुद्दे पर तीनों देश अमेरिका और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन ने अमेरिकी अनुरोध स्वीकार करते हुए अपने ठिकानों के उपयोग की अनुमति ‘विशिष्ट और सीमित रक्षात्मक उद्देश्य’ के लिए दी है।
स्टारमर ने कहा, ” खाड़ी क्षेत्र में हमारे साझेदारों ने हमसे उनकी रक्षा के लिए और अधिक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। समन्वित रक्षात्मक अभियानों के तहत ब्रिटेन के जेट विमान पहले से ही हवा में हैं और उन्होंने ईरानी हमलों को सफलतापूर्वक रोका है।” उन्होंने कहा कि खतरे को रोकने का एकमात्र तरीका मिसाइलों को उनके स्रोत पर नष्ट करना है, चाहे वे भंडारण डिपो में हों या लॉन्चर पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन ईरान पर प्रारंभिक हमलों में शामिल नहीं था और अब भी किसी आक्रामक सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा। ईरानी हमलों के कारण तेल के व्यापार को खासा नुकसान पहुंचा है। ईरानी ड्रोनों ने सऊदी अरब की रास तानूरा रिफायनरी को भी निशाना बनाया है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नये नेतृत्व के साथ परमाणु वार्ता फिर से शुरू करने पर सहमति जतायी है।
ट्रंप ने ‘द अटलांटिक’ पत्रिका को दिए एक टेलीफोन साक्षात्कार में कहा है “वे बातचीत करना चाहते हैं और मैंने बातचीत के लिए सहमति दे दी है, इसलिए मैं उनसे बात करूंगा।” उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किससे बात करेंगे। उन्होंने कहा कि ईरान को यह कदम पहले उठा लेना चाहिए था। ट्रंप ने कहा, “उन्हें पहले ही वह करना चाहिए था जो व्यावहारिक और आसान था। उन्होंने बहुत देर कर दी।” जब उनसे पूछा गया कि क्या बातचीत दो दिन के भीतर हो सकती है, तो उन्होंने कहा, “मैं आपको यह नहीं बता सकता।”
ट्रंप ने कहा कि पहले जिन ईरानी वार्ताकारों से बातचीत हो रही थी, उनमें से कई अब जीवित नहीं हैं। उन्होंने अमेरिकी-इजरायली हमलों का जिक्र करते हुए कहा, “जिन लोगों से हम बातचीत कर रहे थे, उनमें से कई अब नहीं हैं। यह बड़ा झटका था।” उधर ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ किसी भी नयी बातचीत से इनकार कर दिया है। इससे ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच पूरे पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव बढ़ने के साथ ही बयानबाजी और बढ़ गयी है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव श्री लारीजानी ने “पर्दे के पीछे गोपनीय बातचीत(बैक चैनल डिप्लोमेसी)” की खबरों को खारिज कर दिया है और अमेरिकी राष्ट्रपति पर आरोप लगाया कि उन्होंने “भ्रम वाली हरकतें” करके इस इलाके को अस्थिरता में धकेल दिया है। लारीजानी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि श्री ट्रंप ने अपने “अमेरिका पहले” नारे को “इज़रायल पहले” में बदल दिया है और इज़रायल की इच्छाओं के लिए अमेरिकी सैनिकों की कुर्बानी दे दी है। उन्होंने कहा, “श्री ट्रंप ने अपनी भ्रम वाली कल्पनाओं से पश्चिम एशिया को अराजक स्थिति में धकेल दिया है और अब उन्हें और अमेरिकी लोगों के मारे जाने का डर है। लेकिन ईरान अपना अभियान जारी रखेगा।”
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने कहा है कि अब तक ईरान के किसी भी परमाणु ठिकाने पर हमला नहीं हुआ है, लेकिन ‘रेडियोधर्मिता रिसाव ‘ की संभावना को टाला नहीं जा सकता। आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने ईरान और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और परमाणु प्रतिष्ठानों पर किसी भी तरह के सशस्त्र हमले से बचने की अपील की है।
ग्रोसी ने कहा कि आईएईए स्थिति की निगरानी जारी रखेगा और यदि परमाणु सुरक्षा में कोई उल्लंघन होता है तो सदस्य देशों को तत्काल तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। उन्होंने आगाह किया कि यदि रेडियोधर्मिता रिसाव होता है तो बड़े शहरों को खाली कराने की नौबत आ सकती है। ग्रोसी ने कहा कि एजेंसी ने अपने अधिकार क्षेत्र के अनुरूप संभावित रेडियोधर्मिता रिसाव आपात स्थिति की आशंका को ध्यान में रखते हुए तत्काल कार्रवाई की है। आईएईए का ‘इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर’ (आईईसी) सक्रिय है और एक समर्पित टीम स्थिति का आकलन कर रही है, हालांकि संघर्ष के कारण संचार में बाधाएं आ रही हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय सुरक्षा निगरानी नेटवर्क को सतर्क कर दिया गया है और अब तक ईरान से सटे देशों में पृष्ठभूमि स्तर से अधिक विकिरण दर्ज नहीं हुआ है।
ईरान में परमाणु प्रतिष्ठानों की स्थिति पर उन्होंने कहा कि अब तक बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, तेहरान अनुसंधान रिएक्टर या अन्य परमाणु ईंधन चक्र सुविधाओं के क्षतिग्रस्त होने का कोई संकेत नहीं मिला है। आईएईए ने ईरान के परमाणु नियामक प्राधिकरण से संपर्क साधने के प्रयास जारी रखे हैं, लेकिन अभी तक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इजरायल के लेबनान पर हुए हमले में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई और करीब डेढ़ सौ घायल हो गए।
