विवाद: अब ओपन यूनिवर्सिटी में हुई नियुक्तियों पर सियासी घमासान
नियुक्तियों को लेकर भाजपा और कांग्रेस नेता आमने-सामनै
देहरादून। उत्तराखंड में इन दिनों घोटाला-घोटाला का खेला जारी है। यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले में जहां ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां जारी है वहीं विधानसभा में बैकडोर भर्तियों के रद्द होने की तलवार लटकी हुई है। लेकिन इसी बीच ओपन यूनिवर्सिटी में हुई 56 नियुक्तियों के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच महासंग्राम छिड़ गया है।
खास बात यह है कि ओपन यूनिवर्सिटी में हुई इन 56 नियुक्तियों की जांच की मांग यूनिवर्सिटी के अंदर से ही उठी है। टीचर्स संघ ने इन भर्तियों की जांच की मांग की है। इस मामले ने उस वक्त और अधिक तूल पकड़ लिया जब ओपन यूनिवर्सिटी के बीसी द्वारा विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हुए मीडिया संस्थानों को झूठी खबर फैलाने पर मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी गई।
उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि भाजपा शासन के दौरान विश्वविद्यालय से लेकर तमाम विभागों में हुई नियुक्तियों की जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कई शिक्षकों के नाम गिनाते हुए कहा है कि वह बिना किसी परीक्षा के ही नौकरियां कैसे पा गए। उधर भाजपा नेताओं का कहना है कि यह नियुक्तियां तो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थीं। इस पर कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि नियुक्तियां किसी भी सरकार के कार्यकाल में हुई हो अगर अवैध तरीके से हुई है तो उसकी जांच होनी ही चाहिए। उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर ओपन यूनिवर्सिटी में हुई भर्तियों की सूची वायरल हो रही है। वहीं पूर्व शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे द्वारा भी अपने कार्यकाल में अपने सगे संबंधियों व रिश्तेदारों को इंटर कॉलेजों में अपात्र होने के बाद भी उन्हें नौकरियां दिये जाने की खबर चर्चाओं में है।
इधर, पेपर लीक मामले में ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। एसटीएफ ने इस मामले में अब तक 33 वीं गिरफ्तारी संजय सिंह के रूप में गिरफ्तार की है। मुख्यमंत्री धामी इस बाबत यह साफ कर चुके हैं कि अगर जरूरत होगी तो सीबीआई जांच सौंपी जा सकती है। विधानसभा में बैक डोर भर्तियों पर क्या निर्णय होता है अब सभी की निगाहें विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी पर लगी हुई हैं। कुल मिलाकर सूबे में जो घोटालोंकृघोटालों का खेला हो रहा है, जिससे नेताओं की खूब किरकिरी हो रही है।

