मुद्दा: बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने को लेकर फिर उपजा विवाद

मुद्दा: बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने को लेकर फिर उपजा विवाद
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भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ा तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है । यह तनाव तब और बढ़ गया जब भारत-बांग्लादेश के बीच सीमा पर बाड़ लगाने को लेकर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब कर लिया । लगभग 45 मिनट तक चली इस बैठक में बांग्लादेश के विदेश सचिव मोहम्मद जशीम उद्दीन ने हाल में सीमा पर उत्पन्न तनाव को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं ।
यह घटनाक्रम बांग्लादेश द्वारा यह आरोप लगाये जाने के बाद सामने आया कि भारत द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन करके भारत-बांग्लादेश सीमा पर पांच स्थानों पर बाड़ लगाने का प्रयास कर रहा है । बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रणय वर्मा ने कहा कि ढाका और नयी दिल्ली के बीच सीमा पर बाड़ लगाने को लेकर आपसी सहमति है । इस संबंध में बीएसएफ और बीजीबी (बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश) के बीच बातचीत हो रही है ।
उम्मीद है कि इस सहमति को लागू किया जायेगा और अपराधों से निपटने के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाया जायेगा । हालांकि इससे पहले बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के सलाहकार, लेफ्टिनेंट जनरल जहांगीर आलम चौधरी ने कहा कि बीजीबी और स्थानीय लोगों के कड़े विरोध के कारण सीमा पर कांटेदार बाड़ लगाने का काम रोक दिया गया है । उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान हुए कुछ समझौतों के कारण बांग्लादेश-भारत सीमा से जुड़े कई मुद्दों पर तनाव उत्पन्न हुए हैं । विदित हो कि भारत बांग्लादेश के साथ 4,156 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है । जिनमें से 3,271 किलोमीटर पर पहले ही कंटीले तार की बाड़ लग चुकी है । जबकि अभी 885 किलोमीटर पर बाड़ लगाना बाकी है ।
बांग्लादेश सरकार का कहना है कि 2010 से लेकर 2023 के बीच 160 जगहों पर बाड़ लगाने को लेकर भारत के साथ विवाद हो चुका है । इनमें चपाईनवाबगंज, नौगांव, लालमोनिरहाट और तीन बीघा सीमा पर सर्वाधिक तनाव व्याप्त है । बांग्लादेश का आरोप है कि सीमा पर बाड़ लगा कर भारत ने पुराने समझौतों का उल्लंघन किया है । बांग्लादेश की चिंता है कि कंटीले तार लगने से दोनों देशों के दोस्ताना संबंध प्रभावित हो सकते हैं । बांग्लादेश को भारत की चिंता पर भी गौर करना चाहिए और सीमा पार से भारत में होने वाले घुसपैठ व अपराधों पर नकेल लगाने की कोशिश करनी चाहिए ।

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