कामयाबी: जिला सहकारी बैंक से मिले तीन लाख रुपये के ऋण से अखिलेश के सपनों को लगे पंख
देहरादून। पिछले कुछ सालों से भोटिया डॉग की बिक्री बढ़ी है। लोग इन्हें पहाड़ पर घर की सुरक्षा के लिए पाल रहे हैं, रख रहे हैं। बड़े-बड़े महानगरों में पहाड़ी भोटिया डॉग को बाकायदा डिमांड से मंगाते हैं, ज्यादातर महानगरों में लोगों को पहाड़ी भोटिया डॉग का शौक होता है। टिहरी के रानीचौरी में अखिलेश डंगवाल डॉग ब्रीडिंग का कारोबार कर रहे हैं। उन्होंने टिहरी गढ़वाल जिला सहकारी बैंक की शाखा रानीचौरी हिल कैम्पस से दीनदयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना के अन्तर्गत रु० तीन लाख का ऋण लिया, जिसका 0% ब्याज है। इससे उन्होंने डॉग ब्रीडिंग का व्यवसाय शुरू किया है। इस योजना से वह अच्छा स्वरोजगार कर रहे हैं तथा उनकी इससे अच्छी आमदनी हो रही है।
अखिलेश ने जब यह सुना कि बगैर व्याज के ऋण! तो बहुत प्रफुल्लित हो गए। दरअसल अन्य बैंकों में ब्याज दर अधिक है। व्याज देते- देते लोगों की कमर टूट जाती है। को-ओपरेटिव बैंक, सहकारी समिति में तो मूल धन जमा करना होता है और स्वयं आत्मनिर्भर बनना होता है।

सहकारिता मंत्री डाॅ धन सिंह रावत
राज्य के को-ओपरेटिव मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की ठोस नीति उनके सपनों पर पंख लगा रही है। डॉ रावत का कहना है कि दीन दयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना के तहत सहकारी बैंक की 0% ब्याज योजना साढ़े आठ लाख लोगों के जीवन में बदलाव लायी है। उन्होंने बताया कि, अक्टूबर 2017 से 30 नवम्बर 2023 तक 868477 लोगों व 4998 स्वयं सहायता समूह को इस योजना से लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि सहकारिता का सहयोग लेकर राज्य में इस तरह के कई आइडियल कार्य युवा कर रहे हैं। जिससे वह अपनी आमदनी दोगुनी कर रहे हैं। उत्तराखण्ड सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य को पूरा करने के दिशा में काम कर रही है।
भोटिया कुत्तों पर मेहनत कर रहे युवा अखिलेश कहते हैं कि सरकार द्वारा यह बहुत ही अच्छी योजना संचालित की जा रही है। वह आगे कहते हैं इस योजना के लाभ मिलने से वह भोटिया डॉग ब्रीड को देश में इतना प्रचारित करेंगे कि जिससे राज्य का नाम ऊँचा हो। अखिलेश जैसे युवाओं को ऋण देने में डीसीबी टिहरी गढ़वाल के पूर्व अध्यक्ष सुभाष रमोला और महाप्रबंधक संजय रावत ने काफी उदारतापूर्ण रुचि दिखाई थी।
भोटिया डाॅग की खूबियां-
भोटिया डॉग, जिसे हिमालयन शीपडॉग के नाम से भी जाना जाता है, एक मजबूत और साहसी नस्ल है जिसका उपयोग सदियों से उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में चरवाहों द्वारा अपनी भेड़ों और बकरियों को तेंदुओं से बचाने के लिए किया जाता रहा है। उत्तर भारत के हिमालयी जिलों, विशेषकर पश्चिमी हिमालय, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्य के पहाड़ी इलाकों में बड़ी संख्या में पाया जाने वाला भोटिया कुत्ता अपनी वफादारी और सुरक्षात्मक प्रकृति के लिए जाना जाता है।
हालाँकि भोटिया डॉग अन्य क्षेत्रों में पाया जा सकता है, लेकिन ठंडे हिमालयी क्षेत्रों में इसकी शुद्धता की गारंटी है। अन्य क्षेत्रों में, इसे कई अन्य नामों से जाना जाता है जैसे कि इंडियन पैंथर, गद्दी या गद्दी कुत्ता। हालाँकि, यह मूल रूप से तिब्बती मास्टिफ़ की एक नस्ल है और अपनी ताकत, बुद्धि और साहस के लिए पहचानी जाती है।
भोटिया डॉग उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों की संस्कृति और विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिकारियों, विशेषकर तेंदुओं से पशुओं की रक्षा करने की इसकी क्षमता के लिए इसे अत्यधिक महत्व दिया जाता है, और इसे चरवाहों के लिए एक आवश्यक साथी माना जाता है। इसकी मजबूत और मांसल संरचना, इसके निडर आचरण के साथ, इसे हिमालय के कठोर और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में जानवरों के लिए एक आदर्श संरक्षक बनाती है। नस्ल की अनूठी विशेषताओं और स्थानीय समुदायों की आजीविका में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण भोटिया कुत्ते को संरक्षित और संरक्षित करने के प्रयास किए गए हैं। विभिन्न संगठन और नस्ल उत्साही इसके संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह प्राचीन और महान नस्ल अपने मूल वातावरण में पनपती रहे।

