मुद्दा: सरकार के लिए चुनौती बनी लोकायुक्त की नियुक्ति

मुद्दा: सरकार के लिए चुनौती बनी लोकायुक्त की नियुक्ति
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देहरादून। ‘भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश हमारी सरकार का संकल्प है तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की रही है। किसी भी तरह का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’    यह बात आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लोकायुक्त के मुद्दे पर दिए गए आदेश के बाद पत्रकारों से कही गई।
मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि न्यायालय के फैसले का हम सम्मान करते हैं। अभी यह मामला विधानसभा की प्रवर समिति के अधीन विचाराधीन है। प्रवर समिति की रिपोर्ट आने पर इस पर फैसला लिया जाएगा, लेकिन उन्होंने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया कि प्रवर समिति की रिपोर्ट कब आएगी? उल्लेखनीय है कि प्रदेश की त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा इसका प्रस्ताव 2017 में विधानसभा में पेश किया गया, जिसे खुद सरकार ने प्रवर समिति को सौंप कर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था जो अभी तक प्रवर समिति के पास ही धूल फांक रहा है और प्रवर समिति ने इसमें किए गए प्रावधानों में क्या कुछ संशोधन का सुझाव दिया गया है इसके बारे में आज तक किसी को भी कोई जानकारी नहीं है।
बीते 7 सालों से लंबित पड़े इस मामले पर क्या प्रवर समिति 2-4 सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी? जिस समिति ने 6-7 सालों में इस पर रिपोर्ट नहीं दी, तब सीएम धामी भला ऐसी उम्मीद कैसे लगाए बैठे हैं, यह तो वही जानें लेकिन सीएम के बयान को विपक्ष सिर्फ अपनी सरकार की जवाबदेही से बचने वाला ही बता रहा है। हर मुद्दे पर विकल्प रहित संकल्प की बात करने वाले सीएम धामी के सामने 8 हफ्ते में लोकायुक्त की नियुक्ति करने की चुनौती है। भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश और जीरो टॉलरेंस की बात तो लोग सालों से सुनते चले आ रहे हैं। जहां तक न्यायालय के फैसले के सम्मान की बात है वह तो अब सरकार की मजबूरी कही जा रही है। सरकार को अब लोकायुक्त की नियुक्ति तो करनी ही पड़ेगी देखना यह है कि वह कब तक कर पाती है।

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