कांग्रेस: ‘सात हज़ार बीघा ‘काल्पनिक’ है तो 6000 बीघा के प्रस्ताव किसके लिए हुए मंजूर?’ पूर्व विधायक मनोज रावत ने उठाया सवाल

कांग्रेस: ‘सात हज़ार बीघा ‘काल्पनिक’ है तो 6000 बीघा के प्रस्ताव किसके लिए हुए मंजूर?’ पूर्व विधायक मनोज रावत ने उठाया सवाल
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देहरादून। उत्तराखंड में निवेश परियोजनाओं के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रमुख सचिव नियोजन आर. मीनाक्षी सुंदरम द्वारा 7000 बीघा सरकारी जमीन UIIDB को दिए जाने के दावे को ‘काल्पनिक’ बताए जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर पलटवार किया है। पूर्व विधायक मनोज रावत ने दावा किया है कि करीब 1200 एकड़ यानी लगभग 6000 बीघा जमीन से संबंधित प्रस्तावों पर मुख्यमंत्री स्तर से अंतिम सहमति हो चुकी है और कई मामलों में शासनादेश भी जारी किए जा चुके हैं।
मामला अब केवल 7000 बीघा बनाम 45 एकड़ के आंकड़े तक सीमित नहीं रह गया है। विवाद का केंद्र यह सवाल बन गया है कि आखिर UIIDB और सिडकुल के लिए अलग-अलग विभागों की कितनी सरकारी जमीन के प्रस्ताव शासन के सामने रखे गए हैं और इनमें से कितने प्रस्तावों को विभिन्न स्तरों पर मंजूरी मिल चुकी है।
प्रमुख सचिव नियोजन आर. मीनाक्षी सुंदरम ने 12 सितंबर को 7000 बीघा सरकारी जमीन UIIDB को दिए जाने के आरोप को खारिज किया था। उनका कहना था कि UIIDB को न तो 7000 बीघा जमीन मिली है और न ही बोर्ड इतनी जमीन लेने का प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार अभी तक केवल 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध हुई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि UIIDB का उद्देश्य निवेश और आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है। PPP समेत विभिन्न विभागों की परियोजनाओं को UIIDB के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है। सुंदरम के अनुसार अन्य परियोजनाओं के लिए अभी तीन बिड जारी हुई हैं, लेकिन वे भी अंतिम रूप से तय नहीं हुई हैं।
पूर्व केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने इस स्पष्टीकरण के बाद सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि करीब 1200 एकड़ यानी लगभग 6000 बीघा सरकारी जमीन से जुड़े प्रस्तावों की फाइलों पर मुख्यमंत्री स्तर से अंतिम सहमति हो चुकी है। रावत के अनुसार भूमि हस्तांतरण को लेकर कई शासनादेश भी जारी हो चुके हैं। उन्होंने डाकपत्थर की करीब 180 एकड़ भूमि का उदाहरण देते हुए कहा कि यह लगभग 940 बीघा के बराबर है और संबंधित शासनादेश में तीन अन्य भूमि भी शामिल हैं। मनोज रावत ने सरकार से सवाल किया कि यदि 7000 बीघा का आंकड़ा गलत है तो सरकार सार्वजनिक रूप से बताए कि UIIDB और सिडकुल को हस्तांतरित करने के लिए कितने विभागों की कितनी भूमि के प्रस्ताव अनुशंसा समिति के समक्ष रखे गए हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि इनमें से कितने प्रस्तावों पर समिति ने संस्तुति की, कितने प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास पहुंचे और कितने प्रस्तावों पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। रावत का दावा है कि संबंधित भूमि का कुल आंकड़ा 7000 बीघा से भी अधिक हो सकता है, क्योंकि इसमें PPP मोड के लिए प्रस्तावित PWD की जमीन, सिंचाई विभाग और अन्य विभागों की जमीन अभी शामिल नहीं है। उन्होंने स्वास्थ्य और अस्पतालों से जुड़ी भूमि के प्रस्तावों का भी उल्लेख किया।
इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सरकार की ओर से 7000 बीघा जमीन के दावे को गलत और ‘काल्पनिक’ बताया गया है, जबकि कांग्रेस करीब 6000 बीघा भूमि से संबंधित प्रस्तावों के मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचने का दावा कर रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि 7000 बीघा जमीन वास्तव में हस्तांतरित हुई या नहीं, बल्कि यह भी है कि कितनी सरकारी जमीन के प्रस्ताव तैयार किए गए, कितनी भूमि पर अनुशंसा हो चुकी है, कितने शासनादेश जारी हुए और कितने प्रस्ताव मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंच चुके हैं। मनोज रावत ने कहा कि भूमि हस्तांतरण के मामलों में अंतिम जिम्मेदारी सरकार की होती है। इसलिए सरकार को पूरे मामले की भूमि-वार, विभाग-वार और प्रस्ताव-वार जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लोगों को अधिकारियों के साथ अनावश्यक बहस नहीं करनी चाहिए और उन्हें भी अधिकारियों को आरोपित करना अच्छा नहीं लगता, लेकिन जब किसी अधिकारी की ओर से सार्वजनिक बयान सामने आता है तो तथ्यों के साथ जवाब देना जरूरी हो जाता है। अब इस विवाद में गेंद सरकार के पाले में है। यदि 7000 बीघा का आंकड़ा गलत है तो सरकार विभागवार यह स्पष्ट कर सकती है कि UIIDB अथवा सिडकुल के लिए कितनी भूमि प्रस्तावित है। दूसरी ओर यदि कांग्रेस के दावे में भी प्रस्तावित, अनुशंसित, स्वीकृत और वास्तव में हस्तांतरित भूमि को एक ही आंकड़े में जोड़ा गया है, तो उसकी स्थिति भी स्पष्ट होना जरूरी है। यानी विवाद का समाधान बयानबाजी से नहीं, बल्कि फाइलों, शासनादेशों और भूमि के वास्तविक आंकड़ों को सार्वजनिक करने से ही होगा।

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