अवरोध: कोटद्वार-पौड़ी हाईवे पर यातायात पांच घंटे तक रहा बाधित, मलबा हटाने में छूटे पसीने

अवरोध: कोटद्वार-पौड़ी हाईवे पर यातायात पांच घंटे तक रहा बाधित, मलबा हटाने में छूटे पसीने
Spread the love

 

कोटद्वार(आरएनएस)।  बारिश ने पहाड़ के यातायात पर ब्रेक लगा दिए। बुधवार को रातभर और बृहस्पतिवार सुबह से तेज बारिश हुई। पौड़ी नेशनल हाईवे पर कई जगह मलबा और बोल्डर आने से करीब पांच घंटे तक यातायात ठप रहा। लक्ष्मणझूला-दुगड्डा-धुमाकोट स्टेट हाईवे-9 सहित कई अन्य संपर्क मार्ग भी भूस्खलन और पेड़ गिरने से बाधित रहे। एनएच और लोनिवि की टीमों ने जेसीबी व पोकलेन से मलबा हटाकर मार्गों पर आवाजाही शुरू कराई।
पौड़ी नेशनल हाईवे पर सिद्धबली मंदिर के समीप, लालपुल से आगे, पांचवें मील रपटा, दुर्गादेवी मंदिर, भदालीखाल स्थित उबाणी पेयजल स्रोत और गुमखाल-सतपुली के बीच कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ। गुमखाल और सतपुली के बीच सतपुली मल्ली व बैरगांव में भी मलबा और बोल्डर सड़क पर आ गए। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने सिद्धबली, दुगड्डा, गुमखाल और सतपुली चेकपोस्ट पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही रोक दी। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
एनएच प्रशासन की मशीनों से रात में ही मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया था। कोटद्वार-दुगड्डा मार्ग पर सुबह 7:30 बजे, दुगड्डा-गुमखाल के बीच 8:30 बजे एवं गुमखाल-सतपुली मार्ग पर सुबह करीब 10 बजे यातायात सुचारु हो सका। एनएच खंड लोनिवि धुमाकोट के कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार सैनी ने बताया कि कोटद्वार से सतपुली के बीच छह स्थानों पर मलबा और बोल्डर आने से मार्ग बाधित हुआ था। विभागीय टीम ने मशीनों की सहायता से सभी अवरोध हटाकर यातायात बहाल कर दिया है।
वहीं, लक्ष्मणझूला-दुगड्डा-धुमाकोट स्टेट हाईवे-9 पर साझासैंण स्थित ब्लॉक मुख्यालय के पास पेड़ गिरने से सड़क कई घंटे बंद रही। लोनिवि दुगड्डा की टीम ने सुबह करीब नौ बजे पेड़ हटाकर यातायात बहाल किया। उधर, सतपुली-दुधारखाल मोटर मार्ग पर मां शेरावाली मंदिर के समीप एनएच-534 चौड़ीकरण की कटिंग से मलबा सड़क पर आ गया। दंगलेश्वर पुल के पास खैरासैंण तिराहे पर भी मलबा आने से मार्ग बाधित रहा, जिसे सुबह करीब 10 बजे जेसीबी की मदद से साफ किया गया।
उधर, बैजरो-चौखाल-उफरैंखाल-गैरसैंण मार्ग पर सिलोली के पास बुधवार रात से भूस्खलन के कारण आवाजाही ठप रही। घंटों तक यात्री फंसे रहे। पोखड़ा और उफरैंखाल के बीच चौड़ीकरण कार्य वाले हिस्सों में भी लगातार मलबा गिरने से परेशानी बनी रही।

Parvatanchal