सावधान: खाने-पीने की चीजों की पैकिंग में हो रहा पिन और तार का इस्तेमाल,एफएसएसएआई ने उठाया बड़ा कदम

सावधान: खाने-पीने की चीजों की पैकिंग में हो रहा पिन और तार का इस्तेमाल,एफएसएसएआई ने उठाया बड़ा कदम
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नई दिल्ली । भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शुक्रवार को खाद्य व्यापार संचालकों (एफबीओ) को निर्देश किया है कि तत्काल प्रभाव से मेटल की पिन, स्टेपल पिन, वायर और अन्य इसी प्रकार की अन्य चीजों का इस्तेमाल खाने-पीने के उत्पादों को पैक करने और सुरक्षित रखने के लिए न करें, क्योंकि इससे ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो रहा है।
खाद्य नियामक ने कहा कि यह बात सामने आई है कि सजावटी केक के साथ-साथ खाने के पैकेट, केक बॉक्स, मिठाई के डिब्बे, स्नैक पाउच, टेकअवे फूड पार्सल और खाने के दूसरे पैकेजों को पैक करने के लिए भी मेटल की पिन और तारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एफएसएसएआई ने कहा है कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें केक और खाने के पैकेट में मेटल के टुकड़े या स्टेपल पिन मिले हैं। ऐसे मामलों से खाने की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा होता है, क्योंकि ग्राहक अनजाने में इन धातु की चीजों को खा सकते हैं, जिससे उन्हें चोट लग सकती है या सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
नियामक ने सभी खाद्य व्यापार संचालकों को निर्देश दिया कि वे किसी भी खाने की चीज, बेकरी प्रोडक्ट, टेकअवे मील, स्नैक पैकेट या फूड पार्सल को सील करने, जोड़ने, सुरक्षित करने या पैक करने के लिए तुरंत मेटल की पिन, तार या ऐसी ही किसी अन्य चीज का इस्तेमाल बंद कर दें। साथ ही, एफएसएसएआई ने कहा कि जो भी खाद्य व्यापार संचालक इस निर्देश का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। एडवाइजरी के अनुसार, अगर इस निर्देश का पालन नहीं किया जाता है, तो ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006Ó और इसके तहत बने नियमों के प्रावधानों के अनुसार उचित दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इस कदम का मकसद खाद्य सुरक्षा के मानकों को मजबूत करना और फूड पैकेजिंग व हैंडलिंग में मेटल के फास्टनिंग मटीरियल के इस्तेमाल से उपभोक्ताओं को होने वाले अनावश्यक जोखिमों को रोकना है।

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