चारधाम यात्रा में प्रस्तावित रजिस्ट्रेशन शुल्क को कांग्रेस ने बताया ‘जजिया’ कर

बीकेटीसी ने बताया डमी पंजीकरण से मिलेगी निजात
श्रद्धालु के रजिस्ट्रेशन कैंसिल कराने पर रजिस्ट्रेशन शुल्क होगा वापस
यात्रा कैसे व्यवस्थित हो, कैसे सुरक्षित हो और कैसे सुगम हो उसके लिए लगातार प्रयास कर रहेः चमोली
देहरादून। इस साल 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड चारधाम की शुरुआत हो जाएगी। खास बात यह है कि इस बार चारधाम यात्रा पर श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन शुल्क देना पड़ सकता है। हालांकि इस बार अभी शासन से निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन रजिस्ट्रेशन शुल्क से मिलने वाली धनराशि के इस्तेमाल को लेकर बीकेटीसी ने खाका भी तैयार कर लिया है। ऐसे में अब रजिस्ट्रेशन शुल्क के लिए गठित कमेटी के निर्णय का इंतजार है।
रजिस्ट्रेशन शुल्क की स्थिति स्पष्ट न होने के बावजूद भाजपा जहां एक ओर इसे श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था बता रही है, तो वहीं दूसरी ओर मुख्य विपक्षी दल इसे जजिया कर करार दे रही है। बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि चारधाम यात्रा में प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की एक कैपेसिटी है। यही वजह है कि रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था शुरू की गई है। वर्तमान समय में श्रद्धालुओं के रजिस्ट्रेशन ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से किया जा रहे हैं।
अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन वही श्रद्धालु करते हैं, जो चारधाम यात्रा के लिए निकल चुके होते हैं। लेकिन ऑनलाइन में सबसे बड़ी समस्या यही आती है कि डमी पंजीकरण कर दिया जाता है। क्योंकि उसमें कोई पंजीकरण का शुल्क नहीं है। यही वजह है कि रजिस्ट्रेशन शुल्क लेने का निर्णय शासन स्तर पर लिया गया है। साथ ही रजिस्ट्रेशन शुल्क रिटर्न की भी व्यवस्था रहेगी, जिसके तहत अगर कोई व्यक्ति रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद अपना रजिस्ट्रेशन कैंसिल करता है, तो उसको रजिस्ट्रेशन शुल्क वापस कर दिया जाएगा।
बीजेपी ने इस एक प्रयोग बताया है। बीजेपी विधायक और प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा कि पहले चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन भी नहीं होता था, लेकिन सरकार ने रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू की, जिसपर लोगों ने आपत्ति जताते हुए रजिस्ट्रेशन न करने की बात कही, लेकिन सरकार का फोकस है कि यात्रा कैसे व्यवस्थित हो, कैसे सुरक्षित हो और कैसे सुगम हो उसके लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। लिहाजा इस संबंध जो भी सुझाव आ रहे हैं, उसके आधार पर आगे की व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि यात्रा को सही ढंग से संचालित किया जा सके। लिहाजा इसमें आपत्ति जैसा कोई विषय नहीं है। ऐसे में आगे जो परिणाम आएगा, उससे ये पता चलेगा कि ये निर्णय सही था या गलत। बता दें कि 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वहीं तो 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
10 रुपए प्रस्तावित है रजिस्ट्रेशन शुल्क
बीकेटीसी अध्यक्ष अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि तिरुपति बालाजी मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर जैसे तीर्थस्थलों में श्रद्धालुओं की सही संख्या, दर्शन व्यवस्था को लेकर बकायदा बोर्ड है, जो मंदिर की सभी व्यवस्थाओं को संचालित करता है, जिसके तहत श्रद्धालुओं की सही संख्या का डेटा भी उपलब्ध होता है। लेकिन प्रदेश में चारधाम यात्रा के लिए आने वाले लोग कई बार डमी रजिस्ट्रेशन भी करवा देते हैं। ऐसे में सरकार का विचार है कि इस बार चारधाम यात्रा में आने वाले लोगों से रजिस्ट्रेशन के समय ही 10 रुपये शुल्क लिया जाये, ताकि वही लोग यात्रा के लिए आएं, जो वास्तव में दर्शन करना चाहते हैं।
श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा
बीकेटीसी अध्यक्ष अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी कहा कि इस पैसे का इस्तेमाल श्रद्धालुओं को ही सुविधा देने के लिए किया जाएगा, जिसमें मोबाइल जमा कराने के लिए लॉकर, लाइन में लगे लोगों के लिए चाय-पानी की व्यवस्था और बुजुर्गों के लिए खड़ाऊं की व्यवस्था करने का विचार है।
शासन से हरी झंडी मिलने का इंतजार
चारधाम यात्रा की तैयारियों और रजिस्ट्रेशन शुल्क के सवाल पर पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि चारधाम यात्रा से संबंधित सभी जिलाधिकारी के साथ मीटिंग कर ली गई है। साथ ही चारधाम यात्रा से संबंधित तैयारी के लिए जिलाधिकारी को बजट भी जारी कर दिया गया है, जिसके तहत चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जिले को तीन-तीन करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा हरिद्वार, देहरादून और टिहरी जिले को एक-एक करोड़ रुपए जारी किए गए हैं, ताकि ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के दौरान श्रद्धालुओं को सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही बताया कि रजिस्ट्रेशन शुल्क को लेकर शासन स्तर पर मीटिंग प्रस्तावित है। ऐसे में मीटिंग के बाद जो भी निर्देश मिलेगा, उसी अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस ने साधा निशाना
विपक्षी दल कांग्रेस ने चारधाम रजिस्ट्रेशन शुल्क का विरोध किया है। बदरीनाथ विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने कहा कि चारधाम यात्रा से जुड़े व्यापारी कर्जे में डूबे हुए हैं। बावजूद इसके ये पहली सरकार है, जो धर्म के नाम पर टैक्स वसूलने जा रही है। सरकार रजिस्ट्रेशन के नाम पर चारधाम में जजिया कर लगाने का काम कर रही है।
साथ ही कहा कि सनातन काल से जो परंपरा चली आ रही है, उन परंपराओं पर कोठाराघात करते हुए यात्रा को रोकने के नाम पर रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है, जबकि अकेले बदरीनाथ धाम में रहने के लिए एक लाख लोगों की व्यवस्था है। साथ ही सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर चारधाम यात्रा को प्रमोट कर रही है, वहीं दूसरी ओर रजिस्ट्रेशन कराकर श्रद्धालुओं को रोकने का काम कर रही है। लिहाजा इस तरह का निर्णय लेकर सरकार उत्तराखंड के साथ विशेषकर पहाड़ के साथ दुश्मनी ले रही है।

