मुद्दा : पुरानी गलतियों से सबक लेकर नयेपन के साथ करें नये साल का स्वागत

मुद्दा : पुरानी गलतियों से सबक लेकर नयेपन के साथ करें नये साल का स्वागत
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नववर्ष 2026 शुरू हो चुका है। नए उजाले उग आए हैं। नए जोश, नई उम्मीद, नए लक्ष्य और नए संकल्प के साथ इन लम्हों को जीने की कोशिश करें। जो बीत गया, सो बीत गया, अतीत हो गया, उसे अंधे कुएं में जाने दें, बिल्कुल भी अफसोस न मनाएं। वह सिर्फ एक समय था और आज का समय आपके सामने, साथ है। निर्लिप्त रहने की जरूरत नहीं है। समय के साथ संलिप्त हों, क्योंकि वही सत्य है, यथार्थ है और समय खूबसूरत ही होता है। बेशक आज नफरत, सांप्रदायिकता, हिंसा, युद्धों, दंगों और अंततरू हत्याओं का दौर है, लेकिन इनके खिलाफ, नए साल के समय में, एक संकल्प लेना है। मानवीय संकल्प लेना है और उसकी शुरुआत व्यक्ति के स्तर पर ही होती है। धीरे-धीरे वह संकल्प विस्तार पाता है और फिर समय बदलता है। बाबा वेंगा की कुछ भविष्यवाणियां सामने आई हैं। उनमें से दो मानव के विनाश और विध्वंस की हैं। एक, 2026 में तीसरा विश्व युद्ध छिड़ सकता है। दूसरी, नए साल में भारत और पाकिस्तान के बीच भी युद्ध की आशंकाएं जताई जा रही हैं। ऐसी रपट एक अमरीकी थिंक टैंक ‘सीएफआर’ ने भी जारी की है। कश्मीर में नए सिरे से सक्रिय और फैल रहे आतंकवाद के मद्देनजर भारत पाकिस्तान को सबक सिखा सकता है। भारत ने अपनी ऐसी नीति पहले ही बयां कर दी थी कि कोई भी आतंकवादी प्रयास ‘युद्ध’ माना जाएगा और अब भारत ऐसे युद्ध का जवाब देने को तैयार है। यह बाबा वही हैं, जिन्होंने अमरीका में 9/11 आतंकी हमले, सोवियत संघ के विघटन और राजकुमारी डायना की मौत की भविष्यवाणियां भी की थीं। हम ईश्वर से प्रार्थना करेंगे कि इस बार बाबा की घोषणाएं ‘असत्य’ साबित हों और युद्ध की व्यापक और हत्यारी विभीषिकाओं की नौबत न आए।
शांति की मेज पर ही समझौते हो जाएं, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध से ताइवान और मध्य-पूर्व तक सामरिक तनाव पसरे हैं। समय के इन यथार्थों को कैसे नकारा जा सकता है? बाबा ने नए साल में प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक संकट की भी भविष्यवाणी की है। युद्ध और तनाव की बुनियाद में नफरत ही है, हिंसा और हत्याएं उसी भाव से उपजती हैं। ऐसे ही खतरों को भांपते हुए पेरिस, सिडनी, टोकयो सरीखे खूबसूरत महानगरों में नए साल के जश्न रद्द कर दिए गए । अमरीका के लॉस एंजेलिस में 4 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे आतंकी हमले की साजिश बेनकाब हुई है। भारत समेत कई और देशों में भी ‘अलर्ट’ की स्थितियां हैं। उप्र के गाजियाबाद में तलवारों की नुमाइश सजाई गई और हिंदू कार्यकर्ताओं में तलवारें बांट कर आह्वान किया गया कि वे हिंदुओं को मारने वाली ताकतों के खिलाफ आक्रामक हो जाएं। समय के हर दौर में ऐसी आसुरी ताकतें उभरती हैं, लेकिन उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पटक दिया जाता है, जैसा उप्र में किया गया है। सीमापार, पड़ोसी बांग्लादेश में बजेन्द्र बिस्वास नामक एक और हिंदू की, गोलियां मार कर, हत्या कर दी गई। हिंदुओं की हत्याओं के सिलसिले जारी हैं। बुनियाद में नफरत और हिंदू-विरोध क्यों है? भारत और हिंदुओं ने तो बांग्लादेश की मुक्ति, आजादी में बेहद महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इस सवाल का तार्किक जवाब समय ही दे पाएगा। उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के एक युवा छात्र को नस्लभेद का शिकार होना पड़ा। अन्ततः उसकी मौत हो गई। हालांकि सर्वाेच्च अदालत ने इसी घटना पर एक जनहित याचिका स्वीकार की है। क्या 21वीं सदी में भी नस्लभेद का समय है, यह एक यक्ष प्रश्न है? जय सिया राम के नारों को बदनाम किया गया है। गुजरात के अहमदाबाद में दो गुटों में झड़प हो गई। फिर वही हिंदू-मुसलमान..! एक मुफ्ती ने फतवेनुमा बयान दिया कि मुसलमान नए साल का जश्न न मनाएं, क्योंकि यह इस्लाम-विरोधी है, हराम है। नया साल यूरोपीय संस्कृति का हिस्सा है। इस्लामिक नया साल मुहर्रम के बाद शुरू होता है। यदि किसी मुसलमान ने जश्न मनाया, तो उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। ऐसे कई उदाहरण दिए जा सकते हैं, लेकिन नए साल की शुरुआत हो चुकी है, लिहाजा नएपन से ही इसका स्वागत और सम्मान होना चाहिए। सभी को नववर्ष मंगलमय हो।

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