प्रयास: पर्यटन मानचित्र पर बधाणीताल को मिलेगी नई पहचान, डीएम ने शुरू की कोशिशें

प्रयास: पर्यटन मानचित्र पर बधाणीताल को मिलेगी नई पहचान, डीएम ने शुरू की कोशिशें
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रुद्रप्रयाग। जिले के जखोली स्थित बधाणीताल का 3 करोड़ 36 लाख की लागत से सौन्दर्यीकरण एवं विकास कार्य होने जा रहे हैं। ये कार्य राज्य सेक्टर के अंतर्गत पर्यटन विकास के लिए अवस्थापना निर्माण योजना के तहत किए जा रहे हैं। इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रतीक जैन, विधायक रुद्रप्रयाग भरत चौधरी एवं जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत ने संयुक्त रूप से विकास कार्यों का विधिवत शिलान्यास किया। कार्यक्रम से पूर्व स्थानीय ग्रामीणों ने जनपद के शीर्ष प्रशासनिक एवं जनप्रतिनिधियों का पारंपरिक ढंग से गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान विधिविधान से पूजा-अर्चना कर विकास कार्यों का शुभारंभ किया गया। प्रस्तावित कार्यों के अंतर्गत ग्लास हाउस, कैफेट एरिया, रैलिंग एवं फुटपाथ, बहुउद्देशीय मंच तथा ताल का सौन्दर्यीकरण किया जाना है, जिससे बधाणीताल को एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकेगा। इन कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग रुद्रप्रयाग है। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी प्रतीक जैन सहित उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय जनमानस ने स्थानीय मातृशक्ति के साथ बढ़ाणीताल की परिक्रमा भी की। इस अवसर पर धार्मिक आस्था, लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा बधाणीताल प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण क्षेत्र है। यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जिलाधिकारी ने कहा जिला प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि जनपद के दूरस्थ एवं प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर सुदृढ़ पहचान दिलाई जाए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। जिलाधिकारी ने बधाणीताल के प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना करते हुए पर्यटन संवर्धन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा बधाणीताल क्षेत्र का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व भी अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट है।
जिलाधिकारी ने कहा कि पर्यटन विकास के साथ-साथ क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित रखना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए ताल में मछलियों को दाना भी खिलाया और क्षेत्र को स्वच्छ व संरक्षित बनाए रखने का आह्वान किया। जिलाधिकारी ने कहा कि बधाणीताल को केंद्र में रख कर इस संपूर्ण बांगर क्षेत्र को पर्यटन के मानचित्र पर लाना हमारा लक्ष्य है। बधानीताल को जिसे स्थानीय रूप से विष्णु ताल के नाम से जाना जाता है, पौराणिक कथाओं से समृद्ध है। ऐसा माना जाता है कि त्रियुगीनारायण में भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य विवाह के दौरान इसका निर्माण हुआ था। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने इस अवसर को पवित्र करने के लिए अपनी नाभि से जल निकालकर इस झील का निर्माण किया था।
जखोली स्थित बधाणीताल (बधाणी झील) उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में एक सुंदर और पौराणिक महत्व की झील है, जो अपनी रंग-बिरंगी मछलियों और धार्मिक मान्यताओं (भगवान शिव-पार्वती के विवाह से जुड़ाव) के लिए प्रसिद्ध है। यह रुद्रप्रयाग से लगभग 60 किमी दूर, समुद्र तल से 7000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसे श्विष्णु तालश् भी कहते हैं। यहां स्नान व दर्शन से पुण्य मिलता है। जहां बैसाखी पर एक स्थानीय मेला भी लगता है।

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