Home उत्तराखंड विभूति: उत्तराखंड में जन्मी महान विभूति महंत अवैद्यनाथ 

विभूति: उत्तराखंड में जन्मी महान विभूति महंत अवैद्यनाथ 

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प्रस्तुति: राजेश पयाल
गोरखपुर (यूपी) के गुरु गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर रहे महंत अवैद्यनाथ का जन्म 28 मई 1910 को ग्राम कांडी, जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड में श्री राय सिंह बिष्ट के घर हुआ था। आपके बचपन का नाम कृपाल सिंह बिष्ट था और कालांतर में महंत श्री अवैद्यनाथ बनकर भारत के राजनेता तथा गुरु गोरखनाथ मन्दिर के पीठाधीश्वर के रूप में प्रसिद्ध हुए । श्री अवैद्यनाथ जी ने हिन्दू धर्म की आध्यात्मिक साधना के साथ “सामाजिक हिन्दू” साधना को भी आगे बढ़ाय और सामाजिक जनजागरण को अधिक महत्वपूर्ण मानकर हिन्दू धर्म के सोशल इंजीनियरिग पर बल दिया। श्री योगी आदित्यनाथ जी के हिन्दू युवा वाहिनी जैसे युवा संगठन की प्रेरणा भी कहीं न कहीं इसी सोशल इंजीनियरिग की प्रेरणा रही थी।

हिमालय और कैलाश मानसरोवर की यात्रा और साधना से शैव धर्म से गहरे प्रभावित श्री महंत जी पहली बार 1940 में अपनी बंगाल यात्रा के दौरान मेंमन सिंह (तत्कालीन बंगाल) में श्री निवृति नाथ जी के माध्यम से श्री दिग्विजय नाथ जी से मिले। 8 फ़रवरी 1942 को आप गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी बन गए। और इस तरह मात्र 23 साल की अवस्था में श्री कृपाल सिंह बिष्ट से महंत अवैद्यनाथ बनकर विश्वमंच पर एक दैदीप्यमान अक्षय प्रकाश पुंज के रूप में सदैव के लिए अमर हो गये |

आजन्म विवादों से दूर रहने वाले, विरक्त सन्यासी, सज्जन, सरल और सुमधुर और मितभाषी व्यक्तित्व के धनी श्री अवैद्यनाथ जी ने श्री रामजन्म भूमि आन्दोलन को मात्र गति ही नहीं दी अपितु एक संरक्षक की भाँति हर तरह से रक्षित और पोषित भी किया।

राजनैतिक जीवन

दक्षिण भारत के रामनाथपुरम और मीनाक्षीपुरम में अनुसूचित जाति के लोगों के सामूहिक धर्मांतरण की घटना से खासे आहत होते हुए महाराज जी ने राजनीति में पदार्पण किया। इस घटना का विस्तार उत्तर भारत में न हो, इसके लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये गए और राजनीति में रहकर मतान्तरण का ध्रुवीकरण करने के कुटिल प्रयासों को असफल किया |

आपने 1962, 1967, 1974 व 1977 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में मानीराम सीट का प्रतिनिधित्व किया और 1970, 1989, 1991 और 1996 में गोरखपुर से लोकसभा सदस्य रहे। 34 वर्षों तक हिन्दू महासभा और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहकर हिंदुत्व को भारतीय राजनीति में गति देने वाले और सामाजिक हितों की रक्षा करने वाले श्री महंत अवैद्यनाथ जी ने स्वयं को अवसरवाद और पदभार से हमेशा दूर रखा और इस तरह उन्होंने राजयोग में भी हठयोग का प्रयोग बखूबी किया। कितने पद स्वयं महाराज जी के चरणों में आकर स्वयं सुशोभित होते थे और आशीष लेते थे |

सामाजिक समरसता के अग्रदूत

योग व दर्शन के मर्मज्ञ महंत जी के राजनीति में आने का मकसद हिंदू समाज की कुरीतियों को दूर करना और राम मंदिर आंदोलन को गति देना रहा है। हिन्दू धर्म में ऊंच-नीच दूर करने के लिए उन्होंने लगातार सहभोज के आयोजन किए। इसके लिए उन्होंने बनारस में संतों के साथ डोमराजा के घर जाकर भोजन किया और समाज की एकजुटता का संदेश दिया।

हिंदू समाज की एकता ही उनके प्रवचन के केंद्र में होती थी। वह मूलत: इतिहास और रामचरितमानस का सहारा लेते थे। श्रीराम का शबरी, जटायु, निषादराज व गिरीजनों से व्यवहार का उदाहरण देकर दलित-गरीब लोगों को गले लगाने की प्रेरणा देते रहे।

गोरक्षपीठ पर गुरु गोरखनाथजी के प्रतिनिधि के रूप में सम्मानित संत को महंत की उपाधि से अलंकृत किया जाता है। वर्तमान समय में महंत श्री अवेद्यनाथ जी महाराज गोरक्ष पीठाधीश्वर के पद पर आसीन थे। इस मंदिर के प्रथम महंत वरदनाथजी महाराज रहे हैं, जो गुरु गोरखनाथ जी के शिष्य थे।

सरस्वती माता के कृपापात्र

महंत अवैद्यनाथ जी ने वाराणसी व हरिद्वार में संस्कृत का अध्ययन किया था। वह संस्कृत से शास्त्री थे। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़ी शैक्षणिक संस्थाओं के अध्यक्ष के अलावा वे मासिक पत्रिका योगवाणी के संपादक रहे। उन्होंने योग व दर्शन पर लगातार लिखा। वे गोरक्षपीठ से जुड़ी चिकित्सा, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में काम कर रही करीब तीन दर्जन संस्थाओं के अध्यक्ष एवं प्रबंधक थे।

महंत अवैद्यनाथ जी ने गोरखपुर के वर्तमान सांसद योगी आदित्यनाथ  ( पौड़ी गढ़वाल में जन्मे ) को गोरक्षपीठ का न सिर्फ उत्तराधिकारी बनाया बल्कि उन्होंने योगी आदित्यनाथ को 1998 में सबसे कम उम्र का सांसद बनने का गौरव प्रदान किया। बाद में योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू युवा वाहिनी का गठन किया जो हिन्दू युवाओं को धार्मिक बनाने के लिए प्रेरणा देती है ।

महाराजगंज के चौक बाज़ार स्थित गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ महाविद्यालय का नाम इन्हीं के नाम पर रखा गया है।

निधन 

महंत अवैद्यनाथ जी का निधन 12 सितम्बर 2014 को हुआ।