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गज़ब: उत्तराखंड में सात सालों से लोकायुक्त नहीं, कार्यालय  पर हो चुके हैं 13 करोड़ से अधिक खर्च

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संवाददाता

काशीपुर, 04 फरवरी।

उत्तराखंड में 7 सालों से लोकायुक्त का पद रिक्त है। इस अवधि में लोेकायुक्त कार्यालय को 904 शिकायत प्राप्त हुई हैं, जबकि पहले से लम्बित मामले मिलाकर 1543 मामले लम्बित हैं। इनमें अधिकतर मामले अभिकथन अर्थात गंभीर भ्रष्टाचार की शिकायतों के हैं। इस अवधि में मार्च 2020 तक 13.38 करोड़ रुपये बिना लोकायुक्त के लोकायुक्त कार्यालय पर खर्च भी हो गये हैं और यह खर्च अब भी लगातार जारी है। सूचना का अधिकार के अन्तर्गत लोकायुक्त कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से यह खुलासा हुआ है।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट ने कार्मिक विभाग के लोक सूचना अधिकारी से लोकायुक्त की नियुक्ति तथा लोकायुक्त कार्यालय को प्राप्त शिकायतों व खर्च के सम्बन्ध में सूचना मांगी थी। कार्मिक विभाग के लोक सूचना अधिकारी ने लोकायुक्त की नियुक्ति के सम्बन्ध में कोई कार्यवाही सम्बन्धी कोई सूचना धारित न होने तथा लोकायुक्त का पद 24 सितम्बर 2013 से रिक्त होने की सूचना उपलब्ध करायी तथा अन्य सूचनाओं हेतु लोकायुक्त कार्यालय को हस्तांतरित कर दिया। लोकायुक्त कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी ने लम्बित व प्राप्त शिकायतों, अभिकथनों तथा पद रिक्त होने के वर्ष 2013-14 से 30 सितम्बर 2020 तक हुये खर्च की वर्षवार सूचना उपलब्ध करायी।

लोकायुक्त कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी द्वारा पत्रांक 1128 से उपलब्ध सूचना के अनुसार लोकायुक्त का पद रिक्त होने की तिथि को 566 शिकायतें तथा 73 अभिकथन (भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें) लम्बित हैं। लोकायुक्त का पद रिक्त होने की तिथि से 904 शिकायतें लम्बित हैं। वर्तमान में कुल 1543 शिकायतें लम्बित हैं जिसमें 74 अभिकथन तथा 1470 शिकायतें हैं।

लोकायुक्त का पद रिक्त होने के वित्तीय वर्ष 2013-14 से सितम्बर 2020 तक लोकायुक्त कार्यालय पर 13,38,89,303 रुपये की धनराशि खर्च हो चुकी है। इसमें 2013-14 में 162.05 लाख, 2014-15 में 145.12 लाख, 2015-16 में 113.52 लाख, 2016-17 में 176.89 लाख, 2017-18 में 188.89 लाख, 2018-19 में 213.46 लाख वर्ष 2019-20 में 209.51 लाख तथा 2020-21 में सितम्बर 2020 तक 110.02 लाख की धनराशियां शामिल हैं।

वर्ष 2019-20 में खर्च की मदवार धनराशियों में कुल 2,09,51,453 की धनराशि में 1,59,49,208 वेतन, 34,060 मजदूरी, 28,17,295 मंहगाई भत्ता, 65,842 स्थानांतरण यात्रा व्यय, 6,43,635 अन्य भत्ते, 2,99,913 कार्यालय व्यय, 1,28,714 विद्युत देय, 3,956 लेखन सामग्री व फार्मों की छपाई, 49,324 कार्यालय फर्नीचार व उपकरण, 81,595 टेलीफोन पर व्यय, 1,73,528 गाड़ियों का अनुरक्षण व पेट्रोल व्यय, 60,000 व्यवसायिक सेवाओं के लिये भुगतान, 3,97,339 चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति, 1,92,010 अनुरक्षण व 55,034 कम्प्युटर अनुरक्षण/तत्सम्बन्धी स्टेशनरी क्रय की मद में खर्च किये गये हैं।