Home Home कोरोना: इन तीन शब्दों में छुपा है संक्रमण से बचाव, एस एम...

कोरोना: इन तीन शब्दों में छुपा है संक्रमण से बचाव, एस एम एस को याद रखिए और कोरोना से बचिए!  

174
0
डॉ राजे नेगी
सतेंद्र सिंह चौहान
 ऋषिकेश-  वैश्विक महामारी कोविड19 कोरेना वायरस से बचाव हेतु घर से बाहर निकलते समय एस एम एस (S.M.S.) शब्द अवश्य याद रखें,  एस एम एस, इन तीन शब्दों में पहले एस का मतलब सैनिटाइजर, एम का मतलब मास्क साथ रखने एवं तीसरे एस का मतलब सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करने से है। नगर के जाने-माने नेत्र चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ राजे नेगी का कहना है कि आजकल अक्सर ये देखने में आ रहा है कि जब भी लोग घर से बाहर निकलते हैं या बाजार में कहीं जाते हैं तो लोगों के चेहरे पर फेस मास्क तो होता है लेकिन वे उसको सही तरीके से पहनते नहीं हैं। अधिकतर लोग फेस मास्क अपनी नाक के नीचे मुंह ढकने के लिए तो कुछ लोग मुंह से नीचे ठोडी या गले पर टांगे मास्क लगाए रखते हैं और यह दिखाने का प्रयास करते हैैं कि उन्होंने मास्क पहना हुआ है। बचाव की दृष्टि से यह नाकाफी है। आज राज्य सरकार की ओर से भले ही मास्क न पहनने पर जुर्माना तय कर दिया गया हो, लेकिन फिर भी आमजन अपनी सुरक्षा के प्रति सजग नहीं हैं। ऐसे लोग अब रोजाना बढ़ते जा रहे कोरेना संक्रमण को और ज्यादा फैलने में मदद प्रदान करते नजर आ रहे हैं।  डॉ नेगी ने सभी लोगों से अपील की है कि फेस मास्क को चेहरे पर पूरी तरह से नाक के ऊपर तक लगाएं एवं अपनी आंखों पर चश्मा भी पहनें या फ़ेससील्ड का इस्तेमाल करें, ताकि इस भयानक हो चुके संक्रमण से अपना एवं अन्य लोगों का बचाव किया जा सके। इसके साथ ही एक बात और ध्यान रखने योग्य है कि कोरोना महामारी से बचाव हेतु अपने हाथों को बार-बार साबुन से धोना अनिवार्य है, इसलिए एलोवेरा या नीम युक्त हेंडवास का ही अधिक इस्तेमाल करें।  अकसर  हम जब भी घर से कहीं बाहर जाते हैं तो हैंड सैनिटाइजर की बोतल साथ में रखते हैं। हैंड सैनिटाइजर में ट्राइक्लोसान नाम का एक केमिकल होता है, जिसे हाथ की स्किन सोख लेती है। इसके ज्यादा इस्तेमाल से यह केमिकल हमारी त्वचा से होते हुए रक्त में मिल जाता है। रक्त में मिलने के बाद यह हमारी मांसपेशियों के ऑर्डिनेशन को नुकसान पहुंचाता है। डॉ नेगी का कहना है कि सैनिटाइजर के अधिक इस्तेमाल के कारण हमारी स्किन यानी त्वचा खुरदरी एवं बेजान हो सकती है तथा बच्चों की इम्युनिटी पावर को भी यह कम कर देता है। इस बात का ध्यान रखें कि सैनिटाइजर का इस्तेमाल तभी करें जब हम घर से बाहर किसी व्यक्ति या वस्तु के संपर्क में आएं। बार -बार अपने हाथों को अपने चेहरे एवं बालों पर फेरने की आदत से बचें, इससे सर्वाधिक सक्रंमण फैलने का डर रहता है। सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक एवं शारीरिक दूरी के नियम का पालन करते हुए एक बात जो सबसे अधिक ध्यान रखने योग्य है, वो ये कि हमारे आसपास के जितने भी लोग आज कोरेना महामारी से संक्रमित हैं,या संदिग्ध हैं या फिर वो लोग जो कोरोना की जंग जीत चुके हैं, ऐसे लोगों के प्रति हमें किसी भी प्रकार का भेदभाव ना रखते हुए उनके प्रति सम्मान एवं सहानुभूति का भाव रखने की जरूरत है क्योंकि यही वो समय है जब उस पीड़ित व्यक्ति को इस महामारी से जीतने के लिए आपके सहारे, सहानभूति व हौसलाआफजाई की आवश्यकता है। इसलिए ऐसे में जरूरी है कि हम कोरोना पीड़ित व्यक्तियों के प्रति अपनी संवेदनाएं दिलों में बरकरार रखें। उनसे शारीरिक एवं सामाजिक दूरी बनाना आवश्यक है, क्योंकि यह हमारी भी सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा है लेकिन उनके प्रति दिलों में कोई भी दूरी ना रखें। तभी हम उनको इस भयानक बीमारी से उबरने में मदद कर पाएंगे।