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आवाज़: बढ़ती नशाखोरी के खिलाफ मुखर हुई नशाबंदी परिषद, पीएम से की मद्यनिषेध आयोग बनाने की मांग

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कोटद्वार- उत्तराखंड नशाखोरी के बढ़ते चलन को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और महिलाओं में चिंता का माहौल है। उनका मानना है कि नशाखोरी न केवल यहां के सद्भावपूर्ण सामाजिक तानेबाने को खंडित कर रही है बल्कि नौजवान पीढ़ी को बर्बादी के गर्त में भी धकेल रही है। लंबे समय से उत्तराखंड में नशाखोरी के खिलाफ आवाज उठाने वाली सामाजिक संस्था नशाबंदी परिषद एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर मुखर होने लगी है।    संस्था ने  नशे पर अंकुश लगाने के लिए मद्यनिषेध विभाग व आयोग का गठन करने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। परिषद के अध्यक्ष जगमोहन भारद्वाज द्वारा भेजे गये ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड की देवभूमि में अन्य चीजों के बजाय शराब जैसी चीजों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा है कि पिछले दिनों सनेह क्षेत्र में सरकार द्वारा शराब की दुकान खुलवाई गई, जिसको वहां की महिलाओं द्वारा विरोध करने पर बंद कर दिया गया। उसके बाद शासन द्वारा मोबाइल वैन के जरिये शराब को बिकवाया गया। प्रदेश में सरकार द्वारा बेरोजगारों को रोजगार देने की बजाय युवाओं में नशे की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नशे पर अंकुश लगाने के लिए मद्यनिषेध विभाग व आयोग का गठन किया जाना जरूरी है।