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सख्ती: सरकारी अस्पतालों के बीस डॉक्टरों की सेवा समाप्त, नियुक्ति के बाद से ही चल रहे थे गायब

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प्रतीकात्मक फोटो

संवाददाता

देहरादून- जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली प्रदेश की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई कर के अपनी बात का वजन बढ़ा दिया है। यह बड़ी कार्रवाई हमेशा से चर्चाओं में रहने वाले स्वास्थ्य विभाग में की गई है। सरकार ने  प्रदेश के सरकारी अस्पतालों से लम्बे समय से नदारद  20 डॉक्टरों की  सेवा समाप्त कर दी है। गुरुवार को स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने इसके आदेश कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि विभाग में अलग अलग समय पर नियुक्त 20 डॉक्टर नियुक्ति के बाद से ही अस्पतालों से गायब थे।

स्वास्थ्य महानिदेशालय के स्तर पर कई बार डॉक्टरों को नोटिस भेजकर ज्वाइन करने को कहा गया लेकिन इसके बावजूद डॉक्टरों ने तैनाती स्थल पर ज्वाइन नहीं किया। इसे देखते हुए महानिदेशालय ने डॉक्टरों की बर्खास्तगी के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा। शासन की ओर से इस संदर्भ में आदेश कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि राज्य में हाल के दिनों में डॉक्टरों की नियुक्ति और तैनाती की प्रक्रिया में खासी तेजी आई है। इसी को देखते हुए अब अस्पतालों से गायब तमाम डॉक्टरों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। शासन के अधिकारियों ने बताया कि इन पदों पर अब जल्द फिर से नियुक्ति का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा और उत्तराखंड चिकित्सा चयन बोर्ड के जरिए नए डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। राज्य में अभी 763 डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है और उसके बाद फिर से रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।