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आवाज़: एस एफ आइ ने भीषण महामारी के बीच परीक्षा करवाने का किया विरोध, सरकार को भेजा ज्ञापन

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संवाददाता

देहरादून- स्टूडेंट फैडरेशन ऑफ इंडिया (S.F.I.) ने  मांग की है कि यूजीसी द्वारा उस दिशानिर्देश को रद्द कर दिया जाए, जिसके तहत सभी निवर्तमान / अंतिम छमाही/सत्र/ वर्ष के छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित करने के लिए कहा गया है। संगठन की मांग  है कि परीक्षा आयोजित किए बिना छात्रों को प्रोन्नत किया जाना चाहिए और मूल्यांकन की वैकल्पिक पद्धति को अपनाया जाना चाहिए, जो कि कुछ संस्थानों / विश्वविद्यालयों द्वारा अपने छात्रों का मूल्यांकन करने के लिए उपयोग किया गया है।
एस.एफ.आइ. उत्तराखंड राज्य कमेटी के आह्वान पर गोपेश्वर  और देहरादून में जिलाधिकारियों  माध्यम से मानव संसाधन विकास (शिक्षा) मंत्रालय, भारत सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि यूजीसी ने 6 जुलाई, 2020 को जारी अपने दिशानिर्देशों में विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन / ऑफलाइन या अन्य माध्यम से सभी अंतिम छमाही/सत्र के छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित करने की सलाह दी है। इस संबंध में एस एफ आइ का मत यह हैै कि बार-बार परीक्षा से संबंधित अयथार्थवादी निर्णय की वजह से आगामी अकादमिक कार्य में देरी हो रही है। साथ ही छात्रों और अध्यापकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। देश भर में कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे समय में परीक्षा आयोजित करना अव्यावहारिक ही नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने जैसा है। 

दूसरी बात, परीक्षा से संबंधित यूजीसी का दिशानिर्देश देश के संघीय ढांचे के खिलाफ है। पहले ही कई राज्यों ने अपनी चिंताओं में छमाही/सत्र परीक्षा का संचालन करने में असमर्थता जताई है। यह दिशानिर्देश न केवल विभिन्न राज्यों में महामारी की वास्तविक स्थिति को अनदेखा करता है बल्कि परीक्षा आयोजित करने की संभावना के बारे में अनिश्चितता भी पैदा करता है।
ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से परीक्षा आयोजित करने का प्रस्ताव अपनी प्रकृति में ही भेदभावपूर्ण है। यह उन छात्रों को निस्संदेह लाभ प्रदान करता है जिनके पास आधारभूत संरचना और सुविधाएं हैं तथा जो मूल्यांकन के ऑनलाइन पद्धति में भाग ले सकते हैं। इस महामारी में समाज का कमजोर तबका सबसे अधिक प्रभावित है। जिन्हें पहले से ही विभिन्न सामाजिक-आर्थिक बाधाओं ने उच्च शिक्षा की पहुंच से रोका है। मूल्यांकन की यह पद्धति फिर से इन वर्गों के छात्रों को मुख्यधारा से वंचित कर देगा।

   उपर्युक्त चिंताओं और सवालों के तहत संगठन ने अनुरोध किया है कि एम.एच.आर.डी को हस्तक्षेप करना चाहिए और जल्द से जल्द नए निर्देशों के साथ छात्रों के हित में फैसला लिया जाना चाहिए।

   ज्ञापन देने वालों में  गोपेश्वर में ज्योति बिष्ट , शैलेद्र परमार, अमन कोहली व धीरज रामवल आदि थे जबकि  देहरादून में प्रांतीय अध्यक्ष नितिन मलेठा, सचिव हिमांशु चौहान, हितेश थपलियाल व सुप्रिया भंडारी आदि छात्र नेता मौजूद रहे।