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स्क्रीनिंग: त्रिवेंद्र सरकार ने उठाया बड़ा कदम, 50 वर्ष से अधिक उम्र के नकारा कार्मिक किए जाएंगे जबरन रिटायर

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देहरादून- जीरो टॉलरेंस और सुशासन के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर शासन ने राज्य की नौकरशाही के शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस शुद्धिकरण अभियान की पहल सचिवालय से की जा रही है। सचिवालय प्रशासन  ने 50 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने को लेकर सभी सचिवों से ब्योरा मांगा है। अफसरों से अक्षम, बीमार, लगातार अनुपस्थित, आदेश न मानने वाले, विघ्न उत्पन्न करने वाले व संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कर्मचारियों का ब्योरा तलब किया है।

प्रशासन ने सचिवालय के सभी विभागों से कर्मचारियों के नाम के साथ ही कार्यदक्षता, सत्यनिष्ठा को लेकर गोपनीय आख्या भी मांगी है। अपर सचिव सचिवालय प्रशासन विनोद कुमार सुमन की ओर से सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, प्रभारी सचिव, अपर सचिवों को पत्र जारी किया गया है। 

  पत्र में कहा गया है कि मुख्य सचिव की ओर से पांच मई, 2020 को आदेश जारी किए गए थे। आदेश में 50 वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी सरकारी कर्मचारी को नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा बिना कारण बताए तीन महीने का नोटिस या तीन महीने का वेतन देकर जनहित में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने को स्क्रीनिंग कमेटी गठित कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
इसी क्रम में सभी अफसरों को अपने स्टाफ में बीमार, असमर्थ, लंबे समय से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों का ब्योरा देना है। जो कर्मचारी लगातार आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं व सरकारी कार्यों में विघ्न पैदा करते हैं, ऐसे संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कर्मचारियों के नाम भी स्क्रीनिंग समिति के समक्ष रखे जाएंगे। इन सभी के साथ ही जांच में दोषी आरोपी पाए जाने वाले कर्मचारियों की भी गोपनीय आख्या सचिवालय प्रशासन ने जुटाना शुरू कर दिया है।