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पहल: प्रवासी व स्थानीय युवाओं को पारंपरिक कृषि से जोड़ने की शुरुआत, दलहनी फसलों को प्रोत्साहन

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धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
रुद्रप्रयाग- भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परम्परागत कृषि विकास योजना से ग्रामीणों व कास्तकारों को कैसे आत्मनिर्भर बनाया जाय, उनकी आय दोगुनी करने व परम्परागत कृषि कार्य की ओर ले जाने को लेकर अब कृषि विभाग ग्रामीणों के साथ प्रवासी युवाओं को प्रेरित करने लगा है। साथ ही इस पहल को सहयोग ग्राम विकास अधिकारी भी देने लगे  हैं।  भारत सरकार /राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों व कास्तकारों को  आत्मनिर्भरता के साथ परम्परागत कृषि को अपनाने को लेकर कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी सुघर सिंह वर्मा के निर्देशन में फील्ड वर्क शुरू कर दिया गया है।
न्याय पंचायत पौड़ीखाल प्रभारी, सहायक कृषि अधिकारी राजेन्द्र सिंह रौथाण,ग्राम पंचायत चौंथला ग्राम विकास अधिकारी धनपाल सिंह नेगी कनिष्ठ अभियंता कृषि विक्रम सिंह जगवाण ने क्षेत्र में किये जा रहे कार्य का स्थलीय निरीक्षण कर युवाओं को जानकारी भी दी।  बता दें कि बछणस्यूं क्षेत्र के न्याय पंचायत पौड़ी खाल को जिलाधिकारी द्वारा दलहन के लिए चयनित किया गया है जिसको लेकर विगत दिवस अधिकारियों ने ग्रामीणों व प्रवासी युवाओं को साथ लेकर पराम्परागत कृषि विकास योजना की शुरुआत ग्राम बांदन्यू से की है जिसमें युवाओं सतेन्द्र सिंह बिष्ट,धीरेन्द्र सिंह, भरत सिंह, रघुबीर सिंह, केवल सिंह ,शिवपुरी निवासी कमल सिंह बिष्ट,आशिष असवाल व मनोज असवाल द्वारा दलहन व वर्षा के दौरान खेतों के मेंढ़ों पर पांच -पांच मीटर की दूरी पर एक मीटर गहरी एक मीटर चौड़ाई के गढ़े कर फलदार पौध लगाने की पहल की है। सहायक कृषि अधिकारी राजेन्द्र सिंह रौथाण का कहना है कि इससे खेतों की मेंढ़ों पर फलदार वृक्षों से व खेतों के मध्य भाग में कास्तकार दलहन साग-सब्जी उगा कर दोहरा लाभ ले सकता है। परम्परागत कृषि से बंजर भूमि भी आबाद हो जाएगी।यही सरकार की भी मंशा है कि कास्तकार आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बने। उसकी आय दोगुनी हो सके,बेरोजगारी, पलायन जैसी समस्या से भी निजात मिल सके और कास्तकारों की आर्थिकी में भी सुधार हो।