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उम्मीद: रेलवे ट्रैक से जुड़ेंगे चार धाम, उत्तरकाशी भी पहुंचेगी रेल, 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रैन

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संवाददाता

देहरादून- केंद्र सरकार चारधाम क्षेत्र को रेल परियोजना से जोडऩे का इंतजाम कर रही है। बदरीनाथ और केदारनाथ धाम क्षेत्र को रेल से जोडऩे के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर काम तेजी से शुरू हो गया है। एक रेलवे स्टेशन और सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है। पांच सुरंगों के निर्माण कार्य जारी है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के लिए उत्तरकाशी तक रेल पहुंचाने की परियोजना पर भी गंभीरता से प्रयास शुरू हो गए हैं। डोईवाला से उत्तरकाशी व बड़कोट तक रेल परियोजना का सर्वे पूरा हो गया है।
 रेलवे विकास निगम के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास पर इस परियोजना का प्रस्तुतिकरण दिया। रेल विकास निगम के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर हिमांशु बडोनी, एडिशनल जनरल मैनेजर विजय डंगवाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुरेंद्र कुमार व विकास बहुगुणा आदि उपस्थित रहे।
122 किमी का ट्रैक, 24 हजार करोड़ लागत
डोईवाला उत्तरकाशी बड़कोट रेलवे लाइन 122 किमी लंबी होगी, जिस पर 24 हजार करोड़ की लागत का अनुमान है। रेलवे विकास निगम लि. के अधिकारियों ने परियोजना का प्रस्तुतिकरण दिया। बताया कि मार्च 2018 में रेल परियोजना का सर्वे शुरू हुआ था। सर्वे पूरा हो चुका है। रेल परियोजना के तहत 10 स्टेशन बनेंगे। 24 टनल और 19 पुलों का निर्माण होगा।

2025 में तैयार होगी ऋषिकेश कर्णप्रयाग लाइन

ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना 2025 तक तैयार हो जाएगी। परियोजना के कार्य को 11 हिस्सों में बांटा गया है। अगले दो तीन महीनों में परियोजना के सभी हिस्सों के लिए निविदाएं जारी हो जाएंगी। सभी एजेंसियां परियोजना पर एक साथ युद्धस्तर पर कार्य करेंगी। अभी तक ऋषिकेश में एक रेलवे स्टेशन, एक सुरंग का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। पांच पर कार्य जारी है।शिवपुर, व्यासी रेलवे स्टेशन, शिवपुरी व गुलर में पुलों का निर्माण एलएंडटी कंपनी कर रही है। उसके पास दो सुरंगे के निर्माण का कार्य भी है। लछमोली से श्रीनगर के बीच होने वाले कार्य का टेंडर नवयुग को मिला है। कंपनी यहां दो सुरंगों का निर्माण करेगी। श्रीनगर, सुमेरपुर तिमली में तीन पैकेज पर काम होगा। यहां तीन कंपनियां काम करेंगी। यहां काम अगले डेढ़ महीने में शुरू हो जाएगा। बाकी पैकेज का कार्य भी शीघ्र अवार्ड होगा।

एक पुल तैयार, तीन पर काम जारी

चंद्रभागा नदी पर 300 मीटर का ब्रिज लगभग तैयार है। लछमोली में अलकनंदा नदी पर 275 मीटर व श्रीनगर में अलकनंदा पर 450 मीटर के ब्रिज पर कार्य चल रहा है। शेष पुलों का कार्य टनल निर्माण के साथ ही किया जाएगा। श्रीनगर, गौचर एवं सिवाई (कालेश्वर)में एप्रोच रोड ब्रिज का कार्य प्रगति पर है।
125 किमी का ट्रैक, 105.47 किमी सुरंग
ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलवे लाइन की कुल लंबाई 125.20 किमी है। इसका 105.47 किमी भाग सुरंगों में होगा। रेलवे विकास निगम मूल ट्रैक के साथ ही बचाव (एसकेप टनल) के लिए भी सुरंगों का निर्माण करेगा।
15.01 किमी की सबसे लंबी सुरंग
परियोजना के तहत कई सुरंगों का निर्माण होगा। इनमें सबसे लंबी 15.01 किमी की सुरंग देवप्रयाग के सौड से जनासु के मध्य होगी। निर्माण के बाद यह देश की सबसे लंबी रेलवे टनल होगी।

100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रैन

ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलवे ट्रैक पर 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन दौड़ेगी। मालगाड़ी के लिए रफ्तार की सीमा 65 किमी प्रति घंटा होगी। चीफ कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी ने ऋषिकेश में इंजन का ट्रायल कर गति सीमा तय की।

बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर- सीएम

रेल परियोजनाओं का सबसे अधिक फायदा आर्थिक गतिविधियों को होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेल लाइन उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने एवं कृषि बागवानी एवं स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग के लिए भी मददगार साबित होगी। उन्होंने ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर गुलाब वाटिका विकसित करने का भी सुझाव दिया।