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जायजा: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया धारचूला के आपदाग्रस्त गांवों का दौरा

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राकेश रावत 
देहरादून- अपनी निरंतर सक्रियता से विरोधियों मेंं बौखलाहट पैदा कर देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को उनके समर्थक व प्रशंसक ‘संघर्ष का दूसरा नाम हरीश रावत’ यूं ही नहीं कहते हैं।
दो दिन पहले यानि रविवार को गैरसैंण मेंं पहुंच कर संघर्ष का बिगुल फूंकने वाले हरदा मंगलवार को पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विधानसभा क्षेत्र के आपदा पीड़ित गांवों का दौरा. करने पहुंच गए। इस दौरे की तस्वीरें और अनुभव उन्होंने फेसबुक के जरिये लोगों से साझा किए हैं। उन्होंने लिखा है- 
 ‘ ….. राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा जी, स्थानीय विधायक हरीश धामी जी और हमारे पूर्व विधायक  ललित फर्स्वाण जी के साथ धापा गाँव, जिसको अभी आप देखेंगे, भूस्खलन से खतरे में है, वहां को जा रहा हूं और इस समय मैं एक ऐसे पुल के ऊपर खड़ा हूं, जहां जेसीबी मशीन निकालते वक्त जो है जेसीबी मशीन और पोकलैंड गाढ़-गधेरे में नीचे गिर गई।
यह ठीक है कि, बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन ने पुल तो बना दिया, क्योंकि पुल निर्माण का कार्य टेक्निकल वर्क है, बने बनाये पुल होते हैं, वो तो उन्होंने चार-पांच दिन में बनाकर के सबकी प्रशंसा हासिल कर ली, लेकिन न पीछे की तरफ सड़क कहीं है और न आगे की तरफ सड़क कहीं है और इस घटना को आज लगभग 20 दिन से ऊपर हो गये हैं।
तो यह जताता है कि बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन इन इलाकों के अंदर इल-इक्विप्ड है और ये तब हालत है जब चीन, इसके बॉर्डर्स में दस्तक दे रहा है और यह सड़क जिस पुल पर मैं खड़ा हूं, ये पुल शुरुआत है चीन के बॉर्डर के लिये सड़क की और हालात को कोई भी व्यक्ति देख सकता है कि क्या हालात हैं, तो बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन को और ज्यादा साधन जुटाने चाहिये और एक लंबी दृष्टि से यहां की सड़कों को पुनर्गठित करना चाहिये। पुनर्निर्माण का कार्य जल्दी शुरू किया जाना चाहिए… ‘