Home उत्तराखंड अपराध:  अपहरण के मामले में दून का कारोबारी गिरफ्तार,  वारदात में इस्तेमाल...

अपराध:  अपहरण के मामले में दून का कारोबारी गिरफ्तार,  वारदात में इस्तेमाल की गई कार बरामद 

134
0
संवाददाता
देहरादून-  सम्बलपुर उड़ीसा में कन्सट्रक्शन कारोबारी के अपहरण के मामले में फरार चल रहे दून के कपड़ा कारोबारी को पुलिस ने धर दबोचा है। आरोपित के पास से घटना को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल की गई कार बरामद हुई है। उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्यवाही की जा रही है। पुलिस उपमहानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अरुण मोहन जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि बीते रोज पुलिस अधीक्षक सम्बलपुर उड़ीसा ने उन्हें फोन पर बताया कि सम्बलपुर जिले के सासन थाना क्षेत्र से 1 जुलाई को नामी कन्सट्रक्शन कारोबारी/व्यापारी का चार बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। अपहरण का पूरा प्लान तैयार करने वाला घटना में वांछित मुख्य आरोपित राजीव दुआ मूल रूप से देहरादून का ही रहने वाला है और वर्तमान में देहरादून में कहीं छुपा हुआ है। मामले की गम्भीरता को देखते हुए पुलिस उपमहानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  ने तत्काल क्षेत्राधिकारी डोईवाला/एसओजी दिनेश चंद्र ढौंडियाल के नेतृत्व में टीम गठित की और आरोपित राजीव दुआ की गिरफ्तारी के दिशा—निर्देश दिए। राजीव दुआ की गिरफ्तारी के लिए सूचना तंत्र को मजबूत किया गया और इलैक्ट्रानिक सर्विलांस के जरिए राजीव दुआ की जानकारी जुटाई गई। इसी दौरान सर्विलांस के जरिए टीम को जानकारी मिली कि राजीव दुआ रायपुर क्षेत्र में कहीं छुपा हुआ है। इस पर पुलिस टीम ने आरोपित राजीव दुआ की तलाश में अभियान चलाया और मुखबिर की सूचना पर राजीव दुआ, निवासी- अंसारी मार्केट, पलटन बाजार को रविवार डोभाल चौक, रायपुर के पास से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से घटना में इस्तेमाल कार और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है। पूछताछ में आरोपित राजीव दुआ ने बताया कि उसकी पल्टन बाजार में कपड़े की दुकान थी। परन्तु कारोबार ठीक से न चल पाने के कारण वर्ष 2018 में अपने मामा रमेश आहुजा के पास सम्बलपुर उड़ीसा चला गया और वहां अपना कपड़ों का कारोबार शुरू किया। लेकिन कारोबार न चल पाने के कारण उस पर काफी कर्जा हो गया। कारोबार के दौरान उसकी मुलाकात सैफ, निवासी- सम्बलपुर से हुई। सैफ पेंट का काम करता था और अक्सर उसकी दुकान पर कपड़े लेने आता था। सैफ ने उसकी मुलाकात राजा से करवाई। तीनों पर ही काफी कर्ज चढ़ा हुआ था। कर्ज उतारने के लिए तीनों ने राजीव के मामा के पड़ोस में रहने वाले एक कारोबारी नरेश अग्रवाल का अपहरण कर फिरौती मांगने की योजना बनाई । योजना के मुताबिक पहले सभी ने तीन से चार माह तक नरेश अग्रवाल के आने—जाने तथा रोजमर्रा के कार्यों की रैकी की। इस दौरान पता चला कि नरेश अग्रवाल का सैशन बाईपास चौक के पास एक प्लाट था, जहां उसका रोज आना जाना था। तीनों ने वहीं से कारोबारी का अपहरण कर लिया। लेकिन पुलिस  
 सक्रियता के चलते उन्हें कारोबारी को बिना फिरौती के ही छोड़ना पड़ा।