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अनदेखी: मौत के साये में जी रहे हैं दोणी तोक के 5 परिवार, शासन-प्रशासन नहींं ले रहा सुध 

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कुलदीप राणा आजाद

रुद्रप्रयाग, 04 सितंबर। आपदाओं की दृष्टि से अतिसंवेदनशील जनपद रुद्रप्रयाग में आज भी सैकड़ों परिवार खतरे की जद में हैं और  विस्थापन की बाट जोह रहे हैं, लेकिन आज हम  पुजारगाँव के डोणी तोक की बात कर रहे हैं। तस्वीरें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता कि पहाड़ में लोग मौत के बीच कैसे जीवन जीते हैं, लेकिन हमारा तंत्र कैसे हादसोंं का इन्तजार करता है।

जखोली विकासखण्ड के तहत पुजारगाँव के डोणी तोक के पांच परिवार मौत के साए में जीने को मजबूर हैं। वर्ष 2013 की आपदा में डोणी तोक के नीचे से भू-धँसाव हुआ था जिस कारण यहां निवासरत जगदीश प्रसाद, शंभू प्रसाद, गुरू प्रसाद, मोला राम व भूपेन्द्र प्रसाद के घरों में मोटी-मोटी दरार आ गई थी। तब से लेकर आज तक ये पांच परिवार विस्थापन की मांग कर रहे हैं लेकिन उनका विस्थापन नहीं हो सका है। जबकि हर साल इन परिवारों के मकानों में और अधिक दरारें आ रही हैं। वहीं इनके आवासीय भवन भी अब आड़े-तिरछे हो गए हैं जो कभी भी जमीन्दोज होकर बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। पीड़ित परिवारों ने पटवारी से लेकर तहसीलदार, उपजिलाधिकारी, जिलाधिकारी के साथ ही नेता मंत्रियों को पत्राचार कर अपनी समस्या बता चुके हैं लेकिन सुध लेवा कोई नहीं हैं। पिछले वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने भी डोणी तोक का जायजा लेने के बाद इन परिवारों को तत्काल प्रभाव से विस्थापन करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उनके निर्देश भी हवाई  साबित हुए और  बात आई-गई हो गई।

पीड़ित मोला राम व जगदीश प्रसाद का कहना है कि तोणी तोक के पांच परिवारों के पास अन्यंत्र शिफ्ट होने का कोई साधन ना होने से उन्हें इन्हीं टूटे-फूटे घरों में रहने को मजबूर होना पड़ रहा हैं।  दिहाड़ी- मजदूरी  करके परिवार का लालन-पालन करने वाले परिवार भला कहांं से नई जगह पर जाकर अपना नया आशियाना बनाएंगे ?

दोणी तोक ये परिवार बरसात के वक्त  रातों को सो नहीं पाते हैं। हर वक्त डर सताता है कि कहीं मकान जमींंदोज न हो जाय। छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गोंं को तो भारी परिशानियां झेलनी पड़ती हैं। डोणी तोक के इन पांच परिवारोंं के सर पर हर वक्त मौत मंडरा रही है लेकिन प्रशासन सुध लेने को तैयार नहीं है।
  आपदाओं की दृष्टि से अतिसंवेदनशील रुद्रप्रयाग जनपद 23गांवों के 472 परिवार आज भी विस्थापन की बाट जोह रहे हैं। सबसे अधिक उखीमठ में 248 परिवार, जखोली में 192 परिवार और रुद्रप्रयाग में 32 परिवार सालों से विस्थापन की श्रेणी में तो हैं लेकिन विस्थापन नहीं हो सका है। पुजारगाँव के डोणी तोक के पाँच परिवार बीते सात वर्षों से शासन-प्रशासन की घोर उपेक्षा का शिकार हुए हैं। पीड़ितों का कहना है कि इस गांव में कभी कोई अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से जिला प्रशासन और सरकार की होगी।

जिलाधिकारी वंदना सिंह चौहान का कहना है कि जिन परिवारों को मुआवजा दिया गया है, उन्हें जीर्ण-शीर्ण भवनों से हटाया जायेगा।