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आत्मविश्वास: दिव्यांगता को मात दे विश्वमंच पर छाई पहाड़ की बेटी आस्था पटवाल

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संवाददाता
देहरादून, 24 अक्टूूूबर।
पहाड़ की बेटी व दून निवासी आस्था पटवाल ने अपनी दिव्यांगता को मात देते हुए विश्व में अपना और देवभूमि का नाम रोशन किया है। विश्व पटल पर एक मांग को पुरजोर तरीके से पैरवी कर आस्था ने सबको चौंका दिया है।
देहरादून की आस्था पटवाल न देख सकती हैं और न ही सुन सकती हैं। फिर भी अपनी दिव्यांगता को अपनी सशक्तता का माध्यम बना कर आस्था ने संयुक्त राष्ट्र की एक प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल करने में कामयाबी पाई है। आस्था ने जनगणना में बधिर—नेत्रहीन दिव्यांगों की गिनती जनगणना में न करने का विरोध करते हुए जोरशोर से मुद्दा उठाया था।
इस प्रतियोगिता का नाम यूएन वर्ल्ड डेटा फोरम कंपटीशन था। इसका विषय ‘डेटा ( आंकड़ा ) क्यों जरूरी है’ रखा गया था। दुनिया भर से 15 से 24 साल के युवाओं ने इसमें हिस्सा लिया था। पहले और तीसरे नंबर पर पुर्तगाल के युवा रहे। आस्था ने एक वीडियो के जरिए इसमें हिस्सा लिया था। इस वीडियो से बताया कि दो दिव्यांगताओं से ग्रस्त लोगों को भी जनता का हिस्सा मानना क्यों जरूरी है।साइन लैंग्वेज या इशारों के जरिए इस वीडियो में आस्था पटवाल ने कहा था- ‘मैं आप लोगों के लिए अदृश्य हूं। एक मिनट लंबे इस वीडियो में आस्था पटवाल का संदेश है- ‘हमें जनगणना में शुमार नहीं किया जाता। किसी को भी पता नहीं है कि दुनिया में हमारे जैसे कितने लोग हैं। हमें जनगणना में शामिल कीजिए और दूसरों को प्रेरित करने का मौका दीजिए।’
आस्‍था पटवाल ने आगे संदेश में कहा है- ‘आजकल, कोरोना महामारी ने हमारे सामने एक और बाधा खड़ी की है। हम जैसे लोगों के लिए डेटा या आंकड़े हमारे भविष्‍य की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हम छोटी सी चिंगारी जरूर हैं लेकिन पूरे देश को रौशन करने की क्षमता रखते हैं। हम पर भरोसा करके तो देखिए … एक बेहतर दुनिया के लिए हमें अपने साथ जोड़‍िए तो सही।’
   आस्था  पटवाल के इस वीडियो को सेंस इंडिया नाम के अहमदाबाद के एनजीओ ने बनाया और सपोर्ट किया है। आस्था पटवाल ने कहा- ‘जनगणना के जरिए हम दुनिया को बताना चाहते हैं कि हम भी इसी दुनिया का हिस्सा हैं। मैं बड़ी होकर टीचर बनना चाहती हूं और अपने जैसों की मदद करना चाहती हूं।’