Home उत्तराखंड सेहत:  दृष्टि है तभी खूबसूरत सृष्टि है- डॉ राजे सिंह नेगी 

सेहत:  दृष्टि है तभी खूबसूरत सृष्टि है- डॉ राजे सिंह नेगी 

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सत्येंद्र सिंह चौहान
ऋषिकेश, 09 अक्टूबर। दृष्टि है तभी खूबसूरत सृष्टि है। यह कहना है तीर्थ नगरी के नेत्र चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ राजे सिंह नेगी का।
 विश्व सृष्टि दिवस पर डॉ नेगी ने कहा कि मानव शरीर के सभी अंग बेहद महत्वपूर्ण हैं और सब की अलग अलग अहमियत है ।लेकिन दुनिया को देखने वाली आंखें बहुत नाजुक होती हैं, जिनका ख्याल रखने की बेहद आवश्यकताा होती है। उन्होंने कहा कि आंखें कुदरत का दिया हुआ अनमोल तोहफा हैं। उन्हीं की बदौलत इस संसार की खूबसूरती को देख पाते हैं।आंखों की कीमत उनसे पूछो, जिन्हें कम दिखता है या जो लोग देख ही नहीं सकते हैं।आंखों की सुरक्षा को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नेत्र चिकित्सक डॉ नेगी के अनुसार विगत सात माह में कोरोनाकाल प्रारम्भ होने के बाद से नेत्र रोग की समस्याओं मेंं अभूतपूर्व इजाफा हुआ है। वर्क फ्रॉम होम की वजह से दिन भर लैपटॉप मेंं काम करने की वजह से जहां नौकरी पेशा वाले लोग नेत्र रोगों की चपेट में आये हैं, वहीं पांंच वर्ष से लेेेकर कॉलेज गोइंग स्टूडेंट्स में भी ऑनलाइन स्टडीज की वजह से यही समस्या देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि आंखें हमारे शरीर का सबसे नाजुक अंग हैं। इस खूबसूरत दुनिया को देखने के लिए इन आंखों का सही सलामत होना बेहद जरूरी है। इसके लिए इनकी देखभाल करना बेहद जरूरी है।आजकल कम्प्यूटर और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से ड्राई आई सिण्ड्रोम की समस्या पैदा हो रही है। इसलिए जरूरी है कि कम्प्यूटर पर काम करते समय हर बीस मिनट बाद बीस सेकेंड का ब्रेक लेकर आंखों को विश्राम जरूर दें और थोड़ी देर दूर देखने की कोशिश करें। पलकों को जल्दी-जल्दी झपकाने की कोशिश करें। छः वर्ष के कम उम्र के बच्चो को एक घण्टे से अधिक मोबाइल पर समय बिताने न दें। इससे उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास पर प्रभाव पड़ता है। नजर कम होने पर, धुंधला दिखने पर चश्मे की जांच कराएं। गलत नंबर का चश्मा पहनने से आंखों में भैंगापन हो सकता है। चश्मे को साफ और खरोंच मुक्त रखें। उन्होंने बताया कि किसी भी दूसरे व्यक्ति का तौलिये और रूमाल का प्रयोग न करें, इससे संक्रमण हो सकता है। डॉ नेगी के अनुसार मधुमेह और उच्च रक्तचाप नेत्र दृष्टि को क्षति पहुंचा सकते हैं, अंधापन भी ला सकते हैं। उन्हें नियंत्रण में रखें।भोजन में उचित आहार लें।समस्या होने पर स्वयं डॉक्टर न बनें, बिना परामर्श कोई भी दवा का प्रयोग न करें।