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दुर्दशा: पहाड़ों में सरकारी भवन बने भुतहा खण्डहर, कई पटवारी चौकियां व ANM सेंटर हो चुके हैं जर्जर

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विकासखंड रिखणीखाल के अंतर्गत ग्राम द्वारी में स्थापित दो सरकारी भवन खंडहर में तब्दील

इंद्रजीत सिंह असवाल
पौड़ी, 8 जनवरी। बात पहाड़ों की हो रही कांग्रेस  या भाजपा दोनों के सत्ता में रहते हुए पहाड़ों पर कई विभागों के लिए भवनों का निर्माण बड़े स्तर से हुआ था ताकि विभाग अपने भवनों में चल सके व स्थानीय ग्रामीणों को इसका फायदा मिल सके।  पहले ऐसा होता था कि सरकारी कर्मचारी दूर शहरों में रहकर की ड्यूटी पूरी कर लेते थे। महीने में एक आध बार ही या इमरजेंसी में ही क्षेत्र में आते थे। इसके लिए सरकार द्वारा क्षेत्रों के सेंटरों पर ही भवनों का निर्माण करवाया गया था। पर आज कई जगहों में ये भवन खण्डहरों में तब्दील हो गए हैं और सरकारी कर्मचारी किराए के भवनों में रहकर ही कार्य कर रहे हैं।    जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखण्ड रिखणीखाल के ग्राम द्वारी में स्थित दो सरकारी भवन आज जीर्ण-शीर्ण हालत में लगभग खंडहर हो चुके हैं। आज से लगभग दस साल पहले इन दो भवनों का निमार्ण हुआ था।               इनमें से एक राजस्व उपनिरीक्षक (पटवारी) का कार्यालय व निवास है तथा दूसरा
प्राथमिक/ उप स्वास्थ्य चिकित्सा केंद्र की  स्थापना के लिए बनाया गया था। अफसोस की बात है कि इन दोनों भवनों का निर्माण के बाद उद्घाटन भी नहीं हुआ और कार्यालय भी स्थापित नहीं किए गए l ये दोनों भवन केवल सरकारी बजट को ठिकाने लगाने के लिए बना दिए गए l क्षेत्र के लोगों को इन भवनों के उद्देश्य की पूर्ति से वंचित रखा गया। इन दोनों भवनों की हालत आज की तिथि में इतनी खराब है कि भवनों के चारों ओर अक्वण्या की बड़ी बड़ी झाड़ियां उग गयी हैं। इनमें लंगूर,बन्दर,जंगली जानवर व भूतों का आना जाना व निवास बन गया है। जब से ये भवन बने हैं किसी भी विभाग ने गृह प्रवेश तक नहीं किया। आमतौर पर नेपाली व बिहारी मजदूरों का निवास भी बना रहता है।

अब बात करते हैं कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले पटवारी जी की कि वे कहाँ रहते हैैं? पटवारी पैनो 3 जो कि ग्राम गाडियूं पुल बाजार में रहते हैं।जबकि उनके पास पांच छ ग्राम पंचायतों का प्रभार है द्वारी, नावेतली, सिलगाव, तोलियोडांडा, कुइराली, महरकोट, उमेदुबाखल आदि जो पटवारी के वर्तमान निवास से दस से बीस किलोमीटर दूर हैं। ऐसे में पटवारी का इतनी दूर रहने का क्या औचित्य है। ये भी मंथन व चिन्तन की बात है।जबकि उनके लिए सरकारी भवन बने हैं। उन पर बन्दर,लंगूर आदि तान्डव मचा रहे हैं। इसी प्रकार प्राथमिक/ उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन भी द्वारी में खंडहर में तब्दील हो गया है। स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ कागजों में हैं।  जमीनी स्तर पर कुछ नहीं है। इन दोनों भवनों के खिड़की, दरवाजे तक गायब हो चुके हैं। कोई इन को व्यवस्थित करने के लिए तैयार नहीं है। अब इतनी बड़ी लागत के भवन वीरान व खंडहर पड़े हैं। इन दोनों भवनों में कार्यरत एवं इन्हें खंडहर में तब्दील करने के लिए जिम्मेदार लोगों की पड़ताल की जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए l प्रश्न यह है कि क्या उत्तराखंड सरकार के अधिकारीगण, शासन, प्रशासन इन भवनों की सुध लेंगे या हालात ऐसे ही बने रहेंगे ?