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फर्जीवाड़ा: हाईकोर्ट ने की फर्जी शिक्षकों की जांच रिपोर्ट तलब, राज्य सरकार को 3 माह का दिया वक्त

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सुशील खत्री
नैनीताल, 28 दिसंबर। उत्तराखंड हाइकोर्ट ने प्राइमरी व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाए करीब साढ़े तीन हजार शिक्षकों की नियुक्ति के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से तीन माह के भीतर सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की जाँच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। आज सरकार ने कोर्ट से सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हेतु छः माह का समय मांगा परन्तु कोर्ट ने छः माह का समय न देकर तीन माह के भीतर सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच पूरी कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ में न्यायमूर्त्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ में हुई।
मामले के अनुसार स्टूडेंट वेलफेयर सोसायटी हल्द्वानी ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि राज्य के प्राइमरी व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में करीब साढ़े तीन हजार अध्यापक जाली दस्तावेजो के आधार पर फर्जी तरीके से नियुक्त किये गए है जिनमे से कुछ अध्यापकों की एसआईटी जाँच की गई जिनमे खचेड़ू सिंह, ऋषिपाल, जयपाल के नाम सामने आए परन्तु विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण इनको क्लीन चिट दी गयी और ये अभी भी कार्यरत हैं। संस्था ने इस प्रकरण की एसआईटी से जाँच कराने को कहा है। पूर्व में राज्य सरकार ने अपना   शपथपत्र पेश कर कहा था कि इस मामले की एसआईटी जांच चल रही है। अभी तक 84 अध्यापक जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी पाए गए हैं। उन पर विभागीय कार्यवाही चल रही।