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इन दिनों: क्या अब लोगों को पसंद नहीं आ रही मोदी जी के “मन की बात” ? देशवासी कहने लगे हैं कि मोदी जी सपने बेचना बन्द कीजिये

हर्ष सैनी/ आकाश नागर

हरिद्वार। 3 अक्टूबर 2014 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ की शुरुआत की थी। तब इस कार्यक्रम को देशवासियों ने बहुत पसंद जिया था। इतना ही नहीं जब मन की बात आकाशवाणी से शुरू हुआ तो यह कार्यक्रम धीरे धीरे सोशल मीडिया पर पहले नंबर पर चर्चित होने लगा था। टीवी चैनलों में इस कार्यक्रम को दिखाने के बाद बडी बडी डिबेट होती थी। जिसमें मोदी की तारीफों के पुल बांध दिए जाते थे। तब से लेकर अब तक 68 बार मोदी मन की बात कह चुके हैं। लगातार 6 साल पहले पायदान पर रहने के बाद अचानक ‘मन की बात’ पर मोदी का ग्राफ गिरा गया है। यह सोशल मीडिया यूट्यूब पर देखा जा सकता है। जहां पीआईबी इंडिया के साथ ही भारतीय जनता पार्टी और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूट्यूब चैनल पर लोगों ने मन की बात को लाइक कम और अनलाइक ज्यादा किया है। पीआईबी इंडिया में मन की बात को 3800 लोगों ने लाइक किया है। जबकि अनलाइक करने वालों में 9600 लोग शामिल है। इसी तरह भारतीय जनता पार्टी के यूट्यूब चैनल पर 49000 लोगों ने मन की बात को लाइक किया है। जबकि 373 हजार यानी कि 3 लाख 73000 लोगों ने मन की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। इसी के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूट्यूब चैनल पर जहां 34000 लोग मन की बात को पसंद कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ 84000 लोगो ने इसे नापसंद किया है। इसका सीधा संदेश है कि देश की जनता को अब प्रधानमंत्री के मन की बात सुखद नहीं लगती। फ़ अब खुलकर कहने लगी है कि मोदी जी सपने दिखाना बंद करो और हकीकत में काम करके दिखाओ। यह जनता का वह आइना है जिसमें देश की सत्ता पर दूसरी बार काबिज भारतीय जनता पार्टी भय के साए में है। बिहार के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और मोदी जी के मन की बात से निकल रही नकारात्मक बातें भाजपा के लिए बेचैन करने वाली है। ऐसा लगता है कि उत्तराखंड भाजपा के अध्यक्ष बंशीधर भगत ने अभी कुछ दिनों पहले सही कहा था कि अब मोदी जी के नाम पर वोट नहीं मिलने वाला, जनता के बीच जाकर विधायक काम करें। मन की बात के चैनल पर देखने पर स्पष्ट हो रहा है कि देश के अधिकतर लोग उन्हें नापसंद कर रहे हैं । मोदी को नापसंद करने की वजह तो बहुत है। जिनमें एक वजह कोरोना काल की शुरुआत में 21 मार्च को मन की बात में देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहां का था कि सिर्फ 21 दिन का लॉकडाउन इस बीमारी पर अंकुश पा लेगा लेकिन आज 6 माह बाद अंकुश लगाना तो दूर यह बीमारी नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। रोजाना रिकार्ड 78000 मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जा रहे हैं। भारत में 37 लाख 62 हजार केस अब तक आ चुके है। जबकि मौतों का आंकड़ा 64, 469 से ऊपर पहुंच चुका है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की मन की बात को लेकर अब कुछ चुभते सवाल भी किए जाने लगें हैं कि क्या इस सरकार ने जल्द से जल्द काम शुरू करने के लिए मौके का इस्तेमाल किया? क्या भारत का बेहतर भविष्य बनाने के लिए सरकार ने सही दिशा में अगुवाई की? इसका जवाब नहीं में है। वास्तव में राजस्व संकट से जूझ रही सरकार ने सामाजिक क्षेत्र पर खर्च में कटौती की है। दूसरी तरफ देश में युवा वर्ग असमंजस की स्थिति में हैं। वह इसलिए कि जिस महत्वपूर्ण परीक्षा के लिए वह पिछले 1 साल से तैयारी कर रहा था। उस पर अभी तक सरकार अडी खडी है। मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहीं भी अपने संबोधन में जेईई-नीट परीक्षाओं का ज़िक्र नहीं किया। जबकि देश का भविष्य छात्र चाहते थे कि पीएम इस बारे में बात करें। दरअसल, 1 सितंबर से जेईई की परीक्षा है। फिर 13 सितंबर को नीट की परीक्षा है। कोरोना वायरस के रोज़ाना बढ़ते रिकॉर्ड मामलों के बीच होने जा रही इन परीक्षाओं को लेकर कई छात्र चिंतित हैं। इन परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग कई दिन से उठ रही है। विपक्ष भी इन परीक्षाओं को निरस्त कराने के लिए मैदान में आ डटा है। ये परीक्षाएं पहले भी दो बार स्थगित हो चुकी हैं। लेकिन इस बार सरकार परीक्षा स्थगित करने के पक्ष में नहीं है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी गया था । जहां कोर्ट ने परीक्षा स्थगित करने की याचिका यह कहते हुए ठुकरा दी कि छात्र अपना पूरा एक साल गंवा देंगे। कोर्ट ने कहा कि कोविड-19 के समय में भी ज़िंदगी चलती रहनी चाहिए। हम परीक्षाएं नहीं रोक सकते, हमें आगे बढ़ना होगा। इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल ने ट्वीट किया है कि जेईई-नीट के छात्र चाहते थे कि पीएम परीक्षा पर चर्चा करें, लेकिन पीएम ने खिलौनों पर चर्चा की। कुछ इसी तरह देश के लोगों की टिप्पणियां पीआईबी इंडिया, भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूट्यूब चैनल पर आई है।

 विवेक श्रीवास्तव ने लिखा कि सपने बेचना बंद करें मोदी जी। सरकारी नौकरी में हो रही कटौती, निजी करण से देश को बेचना, यह है अच्छे दिन। रामप्रकाश यादव लिखते हैं कि मन की बात तो बहुत कर ली मोदी जी अब कुछ काम की बात कर लीजिए। 2 करोड लोगों के रोजगार वाली बात याद है या भूल गए। कम से कम देश के युवाओं के बारे में तो सोचिए….