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बड़ी खबर: बदलने लगे हैं बाबा रामदेव के सुर, अब सर्जरी और एलोपैथी को बताया श्रेष्ठ पद्धति

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संवाददाता

हरिद्वार, 10 जून। हाल के दिनों में डॉक्टरों और एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के खिलाफ अभद्रता की हद में आने वाले अप्रिय बयान देकर विवाद खड़ा कर देने वाले बाबा रामदेव  के सुर अचानक बदल गये हैं। अब तक एलोपैथी और साइंस को स्टुपिड कह रहे बाबा रामदेव  अब एलोपैथी के मुरीद होते दिख रहे हैं। अपने पिछले बयानों को लेकर विवाद में फंसे और सामाजिक तौर पर भारी किरकिरी झेल रहे बाबा रामदेव ने बुधवार को एक बयान जारी कर  सर्जरी और आपातकाल की स्थिति में एलोपैथी को ही श्रेष्ठ चिकित्सा पद्धति बताया है। बाबा ने मौजूदा विवाद में यह  कह कर अपनी सफाई देने की कोशिश की कि उनका किसी भी संगठन या चिकित्सा की पद्धति से बैर नहीं है। उन्होंने कहा कि जो अच्छे डॉक्टर हैं वे धरती पर देवदूत की तरह हैं। हालांकि  उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गैर जरूरी दवाइयों और इलाज के नाम पर किसी का भी शोषण  किया जाना ग़लत है। पतंजलि योगपीठ में योग ग्राम के उद्घाटन करते हुए स्वामी रामदेव ने  प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की बड़ी सराहना की। उनका कहना था कि ऐसे औषधि केंद्रों से  लोगों को काफी फायदा हो रहा है क्योंकि उन्हें काफ़ी कम दामों में जेनेरिक दवाइयां आसानी से मिल जा रही हैं। 
बाबा रामदेव ने कोरोना की तीसरी लहर का जिक्र करते हुए कहा कि ये तो आती जाती रहेंगी, लेकिन   हर व्यक्ति के लिए इस वक्त अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना इस सबसे अधिक जरूरी है। बाबा ने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की  21 जून से सभी के लिए कोरोना वैक्सीन मुफ्त करने की घोषणा को ऐतिहासिक बताते  हुए सभी को कोरोना वैक्सीन लगवाने के साथ-साथ योग और आयुर्वेद की डबल डोज ले लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इससे सभी के स्वास्‍थ के लिए ऐसा सुरक्षा कवच तैयार होगा कि भारत में  कोरोना के कारण मौत की संभावना खत्म हो जाएगी।
बहरहाल, बाबा रामदेव के ताज़ा बयानों के पीछे उनकी चाहे जो मंशा रही हो, लेकिन समाज, ख़ासतौर से राजनीतिक हलकों में इसके  अलग अलग निहितार्थ निकाले जाने लगे हैं।