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संंकट: नलों पर  गंदा पानी आने से 20 हजार की आबादी के सामने पेयजल संकट 

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संवाददाता

गौचर( चमोली )- नलों पर मिट्टी युक्त पानी आने से क्षेत्र की जनता के सामने पेयजल का घोर संकट पैदा हो गया है। बावजूद इसके जल संस्थान के अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। जनता प्राकृतिक जल श्रोतों से पीठ पर पानी ढोने को मजबूर है।
जनपद चमोली की गौचर क्षेत्र की 20 हजार से अधिक जनता को पेयजल आपूर्ति करने के लिए सिदोली क्षेत्र से निकलने वाले गागरा व लोड़िया गाड गधेरे से पाईप लाईन बिछाई गई हैंं। लेकिन किसी भी योजना पर फिल्टर की व्यवस्था नहीं की गई है । यह हालत तो तब है जब सरकार लगातार जनता को शुद्ध पेयजल आपूर्ति करने का दावा कर रही है । यह समस्या कोई नई नहीं है। हर साल क्षेत्र की जनता को इसी समस्या से जूझना पड़ता है। बावजूद इसके जनता से पानी का भारी भरकम बिल वसूल करने वाला विभाग क्यों इस समस्या के प्रति लापरवाह बना हुआ है, यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही है। क्षेत्र की जनता लंबे समय से शुद्ध पेयजल की मांग करती आ रही है,लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं है। ऐसा नहीं कि जल संस्थान पेयजल योजनाओं पर पैसा खर्च नहीं कर रहा है। लेकिन यह पैसा बेवजह खर्च किया गया साबित हो रहा है।


अलग राज्य बनने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि जनता को शुद्ध पेयजल मुहैया हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। ताज्जुब तो इस बात का है कि पानी के बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि जरूर हुई है। बावजूद इसके क्षेत्र में हल्की बारिश शुरू होते ही नलों में मिट्टी युक्त पानी बहने लगता है । इससे क्षेत्र की जनता के सामने पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो जा रहा है। कोरोना बीमारी से लोग परेशान तो हैं ही अब अगर गंदे पानी की वजह से बीमारी फैल गई तो जनता को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।  विपिन गुसाईं, विक्की कनवासी, सुनीता कनवासी व गुड्डी कनवासी आदि का कहना है कि नलों पर आने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। प्राकृतिक श्रोतों से पानी ढो कर जीवन यापन किया जा रहा है।