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समर्थन: बुधवार को आयोजित प्रतिवाद दिवस को वामदलों समेत विपक्षी दलों ने दिया समर्थन

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संवाददाता
देहरादून, 25 मई।
वामपंथी दलों समेत  विपक्ष की अन्य पार्टियां व जन संगठनों ने बुधवार 26 मई को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आहूत अखिल भारतीय प्रतिवाद दिवस का समर्थन किया है. इस सिलसिले में सभी विपक्षी संगठन वर्चुअल कार्यक्रम करेंगे. 26 मई का कार्यक्रम दिल्ली के बार्डर पर किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने के मौके पर किया जा रहा है. देश की सभी ट्रेड यूनियनों और विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने 26 मई के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का समर्थन किया है. 
विपक्षी पार्टियों और जनसंगठनों ने कहा है कि वे किसान आंदोलन और उसकी मांगों का समर्थन करते हैं. छह महीने से जिस मजबूती के साथ किसान इस आंदोलन को चला रहे हैं,उसको सलाम करते हैं. विपक्षी पार्टियों और जनसंगठनों का आरोप है कि कोरोना महामारी के चरम के बीच भी किसानों की वाजिब मांगों के बारे में केंद्र सरकार उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाए हुए है. किसान संगठन सरकार से वार्ता की मांग कर चुके हैं. केंद्र सरकार को तत्काल किसानों से वार्ता करनी चाहिए और अविलंब तीनों काले कृषि क़ानूनों को वापस लेना चाहिए. 
विपक्षी पार्टियों ने कहा कि मोदी सरकार जितने बड़े-बड़े वायदे करके सत्ता में आई थी, वह उन्हें पूरा करने में नाकाम रही है. उसका शासन किसानों, मजदूरों समेत समाज के मेहनतकश तबकों के लिए तबाही ले कर आया है. उन्होंने आह्वान किया कि अधिकतम लोग 26 मई को कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए प्रतिवाद में उतरें. 
26 मई के प्रतिवाद का समर्थन करने वालों में भाकपा के राज्य सचिव समर भण्डारी, माकपा के राज्य सचिव राजेन्द्र नेगी, सपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.एस.एन.सचान, भाकपा(माले) के गढ़वाल सचिव इन्द्रेश मैखुरी, उत्तराखंड महिला मंच के संयोजक मण्डल की सदस्य निर्मला बिष्ट, पीपुल्स फोरम के संयोजक जयकृत कंडवाल, उत्तराखंड क्रांति दल(डेमोक्रेटिक) के संरक्षक पी.सी.जोशी आदि शामिल थे.