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राज-काज: आखिर किस गलती की सज़ा मिली दो महिला आईएएस अधिकारियों को ?

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संवाददाता
देहरादून, 6 नवंबर।  गुरुवार को  शासन ने अचानक अफसरशाही में आंशिक फेरबदल
करते हुए दो महिला आईएएस अधिकारियों के दायित्व ही नहीं बदल डाले, बल्कि एक जिलाधिकारी को उठा कर सीधे  सचिवालय में संबद्ध कर दिया और दूसरी आईएएस अधिकारी से अपर मुख्य सचिव स्तर के कुछ विभाग हटा दिए।
   देर रात राज्य की नौकरशाही के इस फेरबदल को लेकर सचिवालय के गलियारों से लेकर आमो-खास लोगों तक के बीच शासन के इस निर्णय के अर्थ समझने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।  फेर-बदल के इस आदेश के पीछे की वजह सीनियर आईएएस भी नहीं समझ पा रहे हैैं। वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी, अपर मुख्य सचिव व अध्यक्ष आईएएस एशोसिएशन से औद्योगिक विकास जैसा अहम विभाग हटा दिया गया है। जूनियर आईएएस अफसर रुद्रप्रयाग की जिलाधिकारी सुश्री वंदना सिंह चौहान को डीएम पद से हटाकर कोई नयी नियुक्ति नहीं दी गई। इस के बजाए उन्हें सचिवालय में संबद्ध किया जाना चौंकाने वाला कदम है।
  प्रदेश को पूरा हक़ है कि वह नौकरशाही में कब  किसे क्या जिम्मेदारी सौंपती है। वैसे भी शासन द्वारा समय-समय पर अफसरशाही में फेरबदल करता रहता है, जो एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। लेकिन गुरुवार देर शाम किए गए फेरबदल में चार्ज व जिम्मेदारियां तो हटाई गई लेकिन नई जिम्मेदारी किसी को नहीं दी गई।
वंदना सिंह चौहान ने जिला रुद्रप्रयाग में डीएम का पद संभालने के बाद निरंतर बेहतर काम कर एक मिसाल भी पेश की थी। वंदना सिंह चौहान मेहनती व ईमानदार अफसरो में शुमार हैं। अब बात चर्चाओं व अलग अलग पक्षों की। रही बात अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार की, तो उन से औद्योगिक विकास जैसा बड़ा ओहदा हटाने का निर्णय भी अचरज भरा  है।
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनीषा पंवार राज्य में औद्योगिक ईकाईयों की स्थापना निवेश के लिये सरकार के साथ कई शहरों में भी जा चुकी हैं। मनीषा पंवार से हटाए गए इस विभाग को  फिलहाल आईएएस सचिन कुर्वे ही देंखेंगें।  उनके पास औद्योगिक विकास जैसा अहम विभाग पहले से ही है। देर रात किये गये इस फेर-बदल के पीछे नाराजगी मुख्य वजह मानी जा रही है। हांलाकि मनीषा पंवार के औद्योगिक विकास को अपनी इच्छा से छोड़ने का अनुमान भी कुछ लोग लगा रहे हैं। दूसरी ओर चर्चा ये भी है कि बीते दिनों मनीषा पंवार का बाल विकास विभाग लेने से इंकार करना भी शासन की नाराजगी की वजह बनी है। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग के पद पर रही वंदना सिंह चौहान  को महज़ छह माह में ही रुद्रप्रयाग जैसे जिले से हटाया जाना भी कम आश्चर्यजनक नहीं है। चौहान को कोई नई जिम्मेदारी न देकर अपर मुख्य सचिव कार्यालय से सीधा अटैच कर दिया गया है। अटैचमेंट या बाध्य प्रतीक्षा को अक्सर शासन की नाराजगी से भी जोड़कर देखा जाता है। रुद्रप्रयाग का नया डीएम कौन होगा, अभी तय नहीं किया गया है। बहरहाल, प्रशासनिक उठापटक के चलते रुद्रप्रयाग जैसा पहाड़ी जिला एक कुशल और काम के प्रति समर्पित जिलाधिकारी से वंचित तो हो ही गया है।