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आवाज: वन निगमकर्मियों  ने सरकार को चेताया, मांगें नहीं मानी तो 14 से करेंगे आंदोलन

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गजे सिंह बिष्ट 
देहरादून, 12 अक्टूबर। उत्तराखंड वन विकास निगम में लम्बे समय से ऑडिट आपत्तियों के नाम पर किये जा रहे उत्पीड़न का विरोध शुरू हो गया है। कार्मिकों के हितों के लिए समस्त यूनियनें  एकजुट होकर  14 अक्टूबर से वन विकास निगम मुख्यालय से थाली-चमचे, ढोल ढीली बजाकर जन जागरण के माध्यम से आन्दोलन करेंगी। सोमवार को अरण्य विकास भवन में हुई  बैठक में यह निर्णय लिया गया। यूूनियनों  का कहना है कि
वन विकास निगम में दो वर्ष से लगातार ऑडिट आपत्तियों के नाम पर बिना कम्पलाइन्स रिपोर्ट दिये  व लोक लेखा समिति की जानकारी के कार्मिकों के वेतन से कटौती की गयी। सेवानिवृत्त हो चुके कार्मिकों के देयकों, नगदीकरण व ग्रैच्युटी  से 15 से 25 लाख तक की वसूली की जा रही है। हाईकोर्ट से स्थगन व निर्णय होने के बावजूद आदेशों को रिकाल कर व डबल बैंच में अपील कर लटकाया जा रहा है। क्योंकि वर्तमान प्रबंध निदेशक अक्तूबर में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की प्रोन्नति,
ऑउटसोर्स कार्मिकों का उत्पीड़न समाप्त करने, शासनादेशों का अनुपालन, सेवानिवृत हो गये कार्मिकों के देयकों का भुगतान किये जाने, उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड वन विकास के चार सौ करोड़ रुपये लिया जाना, आदि समस्याओं  के समाधान के लिये नोटिस दिया गया था लेकिन प्रबंध निदेशक समस्याओं के समाधान को लेकर  टालमटोल करते हुए समस्याओं को लम्बित रख कर अपना समय काट रहे हैं। कार्मिक मंच के संयोजक टीएस बिष्ट ने कहा कि समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वन विकास निगम में कार्यरत समस्त कार्मिक एक जुटता के 14-15 अक्टूबर से आरपार की लड़ाई लड़ेंगे। आज की बैठक में घनश्याम कश्यप, पूर्ण रावत, गिरीश नैथानी,विनोद बहुगुणा, वी एस रावत आदि रहे।