Home उत्तराखंड स्मरण: पुण्यतिथि पर याद किए गए लोकप्रिय जननेता स्व. जसवंत सिंह बिष्ट...

स्मरण: पुण्यतिथि पर याद किए गए लोकप्रिय जननेता स्व. जसवंत सिंह बिष्ट ‘जसुदा’

114
0

 

संवाददाता

देहरादून, 04 अक्टूबर। जनता से जुड़े सवालों पर जीवनपर्यंत संघर्षरत रहे सादगी और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति  यूकेडी के प्रथम विधायक स्व० जसवंत सिंह बिष्ट को उनकी 16 वीं पुण्यतिथि पर याद करते हुए पार्टी ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। यहां रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में यूकेडी नेताओं ने स्व. जसवंत सिंह बिष्ट के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की और पार्टी के लिए किए गए उनके योगदान की सराहना की।
कौन थे स्व० जसवंत सिंह बिष्ट ?
 स्व. जसवंत सिंह बिष्ट का ताल्लुक कुमाऊं के एक साधारण परिवार था। उनका बचपन काफी गरीबी में बीता। उनका जन्म सन 1929 में रानीखेत तहसील के बिचला चौकोट पट्टी के स्याल्दे के तिमली ग्राम में हुआ। स्व० जसवंत सिंह बिष्ट हमेशा जनता के दुखदर्द के साझीदार रहे। लोगों के बीच में वे इतने लोकप्रिय थे कि लोग उन्हें प्यार से  ‘जस दा’  के नाम से पुकारा करते थे। 
  एक सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले जननेता के रूप में चारित्रिक ईमानदारी के लिये आज भी उनकी चर्चा की जाती है। सन् 1944 में ग्वालियर में मजदूर यूनियन में रहते हुये स्व. जसवंत सिंह बिष्ट प्रखर समाजवादी नेता डॉ राममनोहर लोहिया के संपर्क में आकर समाजवादी विचारधारा के नेता बन गए। सन् 1955 में स्व० जसवंत सिंह बिष्ट अपने ग्राम में वन पंचायत के सरपंच बने तथा सन 1962 तक कनिष्ठ प्रमुख पद पर रहे। सन 1972 में ब्लॉक प्रमुख पद पर रहते हुये अपनी सादगी और ईमानदारी के कारण जनता के चहेते बन गए। उधर, उत्तराखंड क्रान्ति दल सन 1979 में पृथक उत्तराखंड राज्य बनाने के लिये अपने अस्तित्व में आ चुका था। राज्य की प्रासंगिकता को समझते हुये जसवंत दा उत्तराखंड क्रान्ति दल में शामिल हो गये। सन् 1980 में रानीखेत विधानसभा से चुनाव जीत कर यूकेडी के प्रथम विधायक बने। चर्चाओं व ऐशोआराम से दूर रहकर विधायक होते हुये भी वे बहुत साधारण जीवनचर्या में रहते थे। सन 1980 में जब जसवंत दा विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे, आमजन उनके लिये वोट मांगने के लिये एक ही नारा दिया करते थे- ‘सुकि गलड़ फटी कोट, जसुदा कै दियो वोट’ अर्थात सूखे हुए गाल और फटे कोट वाले जसवंत दा को वोट दें। ये वाक्य जसवंत दा के व्यक्तित्व को दर्शाता है। तत्कालीन सामाजिक और राजनीतिक जीवन में उनकी ईमानदारी की मिसाल दी जाती थी। स्व जसवंत सिंह बिष्ट साधारण जीवन व्यतीत करने वाली लोकप्रिय शख्सियत  रहे हैं। जसवंत दा को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। स्व० जसवंत सिंह बिष्ट दोबारा सन 1989 में दोबारा विधायक बने। विधायक होते हुये जसवंत दा को जब भी स्याल्दे या अन्य जगह जाना होता था तो बस नहीं मिलने पर ट्रक से भी सफर कर के  गंतव्य के लिये चले जाते थे। आज भी अल्मोड़ा ही नहीं बल्कि समूचे उत्तराखंड का बुद्धिजीवी वर्ग और आमजन जसवंत दा को याद करता है। रविवार को स्व जसवंत सिंह बिष्ट ‘जसुदा’ की पुण्यतिधि पर उनकी याद में यूकेडी की ओर से उनकी स्मृति में देहरादून में कचहरी परिसर स्थित शहीद स्मारक में पौधरोपण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष सुनील ध्यानी ने की। गोष्ठी में पार्टी नेता लताफत हुसैन, बहादुर सिंह रावत, राजेन्द्र बिष्ट, उत्तम रावत, शिव प्रसाद सेमवाल, प्रताप कुँवर, राजेश्वरी रावत, किरन रावत, मीनाक्षी घिल्डियाल, ऋषि राणा, नवीन भदूला, पीयूष सक्सेना, राजेंद्रजीत, पंकज रतूड़ी, भगवती डबराल, कमलकांत, आशुतोष भंडारी, सोमेश बुड़ाकोटी, विनीत सकलानी, राजेन्द्र प्रधान व वीरेश चौधरी आदि उपस्थित रहे।