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विरोध:  स्कूल खोलने पर शिक्षक संगठन असहमत, केन्द्र व राज्य सरकार को भेजे सुझाव

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संंवाददाता
देहरादून, 14 अक्टूबर। 
पहली नवंबर से स्कूल खोलने का रावत कैबिनेट का फैसला आते ही असहमतियों के स्वर भी उठने लगे हैं। सरकार के इस निर्णय को लेकर सबसे पहले मुखर हुआ है अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन। संगठन के पदाधिकारियों ने विद्यालय खोले जाने के फैसले को गलत ठहराते हुए  केन्द्र व राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि बच्चों से सोशल डिस्टेंसिंग करवा पाना बहुत मुश्किल है। अभी कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, इसलिए अभी स्कूल खोलने का मतलब बच्चों की जान संकट में डालना है। संगठन ने अभी स्कूल खोलना पूरी तरह से अनुचित बताया है।
    संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री सुभाष चौहान का कहना है कि बच्चे देश के कर्णधार हैं, कल देश का भार इन्हीं बच्चों के कंधों पर आना है। यदि यही बच्चे सुरक्षित नहीं रहेंगे तो देश आगे कैसे बढ़ेगा। वर्तमान में उतराखण्ड के सभी जनपदों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती है, तब तक विद्यालय नहीं खुलने चाहिए। प्रत्येक विद्यालय में बच्चों के बैठने की व्यवस्था के लिए कमरे सीमित होते हैं। वहां सामाजिक दूरी का पालन करवा पाना मुश्किल है। अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेश त्यागी व महामंत्री सुभाष चौहान ने कहा कि यदि एक भी बच्चा संक्रमित निकलता है तो सारे बच्चे बीमारी की चपेट में आ जायेंगे। इसलिए वर्तमान स्थिति को देखते हुए फिलहाल विद्यालय बंद रहें तो उचित होगा। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई का माध्यम महामारी के काल में अच्छा विकल्प है। शिक्षकों से भी संगठन ने अनुरोध किया है कि ऑनलाइन पढ़ाई सुचारू रखें। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैन सिंह ने कहा कि सुझाव की प्रति केंद्र और उत्तराखंड सरकार को प्रेषित की गई है।