Home उत्तराखंड शर्मनाक:  शहीदे आज़म भगतसिंह के पोस्टर फाड़ने पर  जताया कड़ा विरोध

शर्मनाक:  शहीदे आज़म भगतसिंह के पोस्टर फाड़ने पर  जताया कड़ा विरोध

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संवाददाता
देहरादून, 29 सितंबर। एचएनबी गढ़वाल विश्विद्यालय प्रशासन द्वारा शहीद भगत सिंह का अपमान करने पर एसएफ़आई ने देहरादून में विवि प्रशासन का पुतला फूंक कर विरोध जताया। एसएफ़आई के प्रदेश सचिव हिमांशु चौहान ने बताया कि एसएफ़आई के कार्यकर्ताओं  द्वारा करनपुर क्षेत्रीय कार्यालय से नारेबाजी करते हुए डीएवी (पी.जी) कॉलेज के गेट पर गढ़वाल प्रशासन का पुतला दहन किया गया। प्रदेश अध्यक्ष नितिन मेलठा ने बताया कि 28 सितम्बर को शहीद-ए-आज़म भगतसिंह का जन्मदिवस श्रीनगर इकाई के द्वारा मनाया गया। उन्होंने कहा कि आज शहीद-ए आज़म भगत सिंह की जयंती है, राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ ही सामाजिक एवं आर्थिक स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ते हुए स्वतंत्रता संग्राम में अपना अमूल्य बलिदान देने वाले भगत सिंह को जहाँ आज पूरा देश नमन कर रहा है, वहीं गढ़वाल विश्वविद्यालय के बिड़ला परिसर में भगत सिंह की याद में एसएफ़आई  द्वारा लगाए गए पोस्टर्स विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा फाड़ दिए गए।

श्रीनगर इकाई सचिव कमलेश नेगी ने बताया कि डीएसडब्ल्यू से शिकायत की गई तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि पोस्टर फाड़ना गलत है, लोकतंत्र में सभी को अपने विचार अभिव्यक्त करने की आज़ादी है। उन्होंने इस कृत्य पर प्रशासन की गलती स्वीकार की लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।  एसएफ़आई उत्तराखंड राज्य कमेटी ने इस मामले में उचित कार्यवाही की मांग की है। इस अवसर पर डीएवी इकाई सचिव शैलेंद्र परमार, कार्यकारी अध्यक्ष सोनाली नेगी, मोहित बिष्ट, अमन सिंह, शार्दूल भंडारी, मनीष नॉटियाल मनीष कुर्मी आदि छात्र नेता मौजूद रहे ।

    उधर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कल शहीदे आजम भगतसिंह के जन्मदिन पर एस एफ आई द्वारा लगाऐ गये पोस्टरों को विश्व विद्यालय प्रशासन द्वारा फाड़े जाने की कडे़ शब्दों में निन्दा की है तथा दोषियों को दण्डित करने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि देश की आज़ादी के लिये सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदे आज़म भगतसिंह की विरासत के साथ विश्वविद्यालय में इस प्रकार का व्यवहार करना शहीदों का अपमान है। इसे किसी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में राजेंद्र पुरोहित, अनन्त आकाश, लेखराज, कमरूद्दीन, माला गुरूंग वह शम्भूप्रसाद ममगाई आदि ने विचार व्यक्त किए ।