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न्याय: रिश्वतखोर अफसर को 6 साल की सजा, 8 साल पहले ली थी 1 लाख रुपए की घूस

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संवाददाता
देहरादून, 11 नवंबर।  सहकारी विभाग के एक पूर्व अफसर को रिश्वतखोरी के आरोप में विजिलेंस कोर्ट ने छह साल कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी को हरिद्वार में वर्ष 2013 में एक लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

 

शासकीय अधिवक्ता राजीव कुमार गुप्ता के अनुसार,  करीब आठ साल पुराना यह मामला हरिद्वार का है। तब उमराव सिंह सैनी हरिद्वार सहकारी समितियों के सहायक निबंधक के पद पर सेवारत थे।

 

अभियोजन पक्ष के अनुसार, जगदीश शर्मा नामक एक रिटायर्ड कर्मचारी ने विजिलेंस विभाग को अपने विभागीय अफसर द्वारा रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की थी। शर्मा उस वक्त रिटायर्ड हुए थे। इसके बाद उन्हें ग्रेच्युटी और पेंशन के रूप में 13 लाख रुपये मिलने थे। इसके लिए उन्होंने आवेदन किया तो सहायक निबंधक उमराव सिंह सैनी टाल मटोल करने लगे। कुछ दिनों के बाद उन्हें पता चला कि सैनी उनसे इसकी एवज में 25 प्रतिशत का हिस्सा मांग रहे हैं। यह रकम तीन लाख 25 हजार रुपये बैठती थी।  रिश्वत की पहली किश्त के लिए जगदीश शर्मा ने उन्हें अपने घर बुलाया था।
वहां पहली किश्त के रूप में सैनी को एक लाख रुपए दिए जाने थे। सैनी वहां पहुंच कर जैसे ही रिश्वत के रुपए लिए, पहले से ट्रैप बिछा चुकी विजीलेंस की टीम ने तत्काल सैनी को एक लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार कर लिया। सैनी के खिलाफ कोर्ट में विजिलेंस ने आठ गवाह पेश किए थे। इन गवाहों और लिखित साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सैनी को दोषी करार दिया। इस पर न्यायालय ने उन्हें छह साल की सजा सुनाते हुए  50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
गौरतलब है कि पूर्व सहायक निबंधक सैनी अपने कार्यकाल के दौरान काफी विवादों में रहे। कई बार उनके खिलाफ विभागीय जांच भी हुई थी। सैनी पर 2010 में ऊधमसिंहनगर में गेहूं खरीद मामले में भी आरोप लगे थे। इससे पहले पंचायत चुनावों में सहायक निबंधक रहते हुए उन पर चुनाव परिणामों में गड़बड़ी का आरोप भी लगा था।