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​आवाज: उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति का मानव श्रृंखला बना कर सरकार विरोधी प्रदर्शन 

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संवाददाता
देहरादून, 23 सितम्बर। 
उत्तराखण्ड संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति के तत्वावधान में विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने गांधी पार्क के बाहर मानव श्रृंखला बना कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर सीटू , इंटक , एटक , एकटू , बैंक व विभिन्न यूनियनों के सदस्य गांधी पार्क के बाहर इकट्ठा हुए और मानव श्रृंखला बनाई व नारेबाजी की।  संघर्ष समिति की ओर से  राष्ट्रपति और राज्यपाल को ज्ञापन भेजे गए ।
इस अवसर पर सीटू के सचिव लेखराज ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों में जो कटौती बिल संसद में लाया गया है, वह निश्चित तौर पर मजदूर विरोधी बिल है। इससे सरकार का मजदूर विरोधी चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा 12 घण्टे काम का आदेश जारी कर श्रमिकों के ऊपर काम का बेहिसाब बोझ डाला जा रहा है, जिससे 3 शिफ्ट के स्थान पर दो ही शिफ्ट चलेंगी। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों को निलंबित करने का प्रस्ताव उत्तराखण्ड सरकार की केबिनेट ने पास कर सेंटर को भेजा है। इससे श्रम क़ानून जो कि श्रमिकों के सुरक्षा कवच थे, उन्हें समाप्त कर मजदूरों को मालिकों के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया है। इससे मजदूर गुलामों की जिंदगी जीने पर मजबूर होंगे।

इस अवसर पर इंटक के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व केबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि यह सरकार कोरोना काल को एक अवसर के रूप में ले रही है। इसी कारण से वह किसान मजदूर विरोधी बिलों को संसद में जोर जबरदस्ती से पारित कराना चाहती है। इसे लेकर मजदूर और किसान चुप नहीं बैठेगा और इस सरकार को आंदोलन करके किसान व मजदूर विरोधी कानून वापस लेने पर बाध्य कर देगा। उन्होंने कहा कि सरकार रक्षा ,रेल, बैंक ,बीमा कोल इंडिया, एयर इंडिया , व हवाई अड्डे आदि सहित तमाम सार्वजनिक संस्थानों को निजी हाथो में बेच रही है। जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 25 सितम्बर को होने वाले किसान आंदोलन को उत्तराखंड ट्रेड यूनियन्स संघर्ष समिति अपना समर्थन देगी व किसान आन्दोल में हिस्सेदारी करेगी ।

सीटू के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि केंद्र सरकार किसान व मजदूर विरोधी बिल वापस ले तथा संसद में मजदूरों के कानूनों को और प्रभावी बनाने के लिए बिल लाये व किसान विरोधी बिल, जो संसद में अराजकता फैला कर पारित किया गया, उसे वापस ले। उन्होंने राज्य  सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार मजदूरों के खिलाफ साजिश बन्द करे और कॉरपोरेट को खुश करने से बाज आये।

इस अवसर पर ऐटक के प्रदेश महामंत्री अशोक शर्मा ने कहा कि देश में सभी ट्रेड यूनियन्स पीएम मोदी के मजदूर विरोधी रवैये का विरोध कर रही हैं। यदि  सरकार अपने कदम पीछे नहीं हटाती है तो आर -पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों में बदलाव के चलते 300 से कम कामगारों पर श्रमक़ानून लागू नहीं होने और उन्हें कभी भी कार्य से हटा देने से मजदूर बर्बाद हो जाएगा, जिसका कॉरपोरेट्स नाजायज फायदा उठाएगा ।
इस अवसर पर ऐटक के समर भंडारी , एकटू के के.पी. चन्दोला,  इंद्रेश मैखुरी , इंटक के ओ .पी सूदी, गगन कक्कड़, सीटू के भगवंत पयाल आदि ने विचार व्यक्त किये ।
इस अवसर पर मजिस्ट्रेेेेट के माध्यम से मांग पत्र महामहिम राष्ट्रपति व महामहिम राज्यपाल को भेजा गया । इस अवसर पर उत्तराखण्ड किसान सभा के प्रान्तीय अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सजवाण, महामंत्री गंगाधर नौटियाल व राजेन्द्र पुरोहित ने भी विचार व्यक्त करते हुए मजदूर किसानों को साथ – साथ मिलकर संघर्ष करने पर बल दिया और मजदूरों के संघर्ष के साथ एकजुटता प्रकट की व समर्थन दिया।

इस अवसर पर अनन्त आकाश , बैंक यूनियन से एस. एस.रजवार , वीरेंद्र पुंडीर, अनित, नीरज भंडारी, वी.के.छत्रपाल, जितेंद्र कुमार , अनिल कुमार, आशीष पुरोहित, रविन्द्र नौडियाल, निर्लेश,  मामचंद, दीपक शर्मा, सुनीता बबिता, ईश्वरपाल शर्मा,  विशेष कुमार, लक्ष्मी नारायण भट्ट, ए. बी.उनियाल, भार्गव चन्दोला, देवराज, मुकेश, दिनेश, मुरारी, आशीष अली, मनीष, जगमोहन, राकेश, जसवंत, सुभाष, नरेश, देव सिंह, सन्तु, राम लाल, वीरेंद्र सिंह, धर्मपाल आदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे ।